नाग पंचमी पर सांप को दूध पिलाना पुण्य है या पाप? पूजा से पहले जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक कारण
नाग पंचमी पर जीवित सांप को दूध पिलाना धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से गलत है। शास्त्रों के अनुसार, नाग ...और पढ़ें

जीवित सांप पर दूध चढ़ाना चाहिए या नहीं? (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 17 अगस्त को नाग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने का विधान है। साथ ही नाग देवता को दूध पीलाने का अधिक महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन नाग देवता की प्रतिमा पर दूध अर्पित करने से कालसर्प दोष की समस्या दूर होती है।
नाग देवता की कृपा से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। क्या आप जानते हैं कि नाग पंचमी के दिन जीवित सांप को दूध पिलाना सही है या गलत। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको एस्ट्रोपत्री के श्री चंद्रेश शर्मा जी के अनुसार बताते हैं जीवित सांप को दूध पिलाना चाहिए या नहीं।
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(Picture Credit: AI Generated)
श्री चंद्रेश शर्मा जी के अनुसार, नाग पंचमी पर नाग देवता को दूध चढ़ाने की परंपरा को लेकर धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण हैं।
"प्रतिमासु पूजा न तु प्रत्यक्ष सर्पे।" — शास्त्र व जीव विज्ञान
धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
नाग पंचमी पर दूध अर्पण को लेकर शास्त्र और विज्ञान में निम्नलिखित बातें स्पष्ट की गई हैं:
जीवित सांप को दूध पिलाना वर्जित: धार्मिक शास्त्रों के अनुसार जीवित सांप को दूध पिलाना सही नहीं है, क्योंकि सांप स्तनधारी जीव नहीं हैं और दूध उनके फेफड़ों में जाकर उनकी मृत्यु का कारण बन सकता है।
प्रतिमा और शिवलिंग पर अभिषेक: शास्त्रों में नाग देवता की प्रतिमा, शिवलिंग या सर्प की बांबी (मिट्टी के बिल) पर दूध से अभिषेक (अर्पण) करने का विधान बताया गया है, न कि जीवित सांप को दूध पिलाने का।
शास्त्रसम्मत पूजा विधि
नाग पंचमी पर नाग देवता की प्रतिमा पर दूध अर्पित करना ही शास्त्रसम्मत और जीव-दया के अनुकूल माना गया है।
नाग पंचमी की पूजा का महत्व
- धार्मिक मान्यता के अनुसार, नाग पंचमी के दिन पूजा-अर्चना करने से सर्प भय दूर होता है। साथ ही परिवार के सदस्यों की सांप के काटने से रक्षा होती है।
- सनातन धर्म में नाग देवता का संबंध भगवान शिव से अधिक है। महादेव अपने गले में नाग देवता को धारण करते हैं और जगत के पालनहार भगवान विष्णु चातुर्मास के दौरान विष्णु शेषनाग की शय्या पर विश्राम करते हैं। इसलिए नाग देव की साधना करने से महादेव के संग विष्णु जी की कृपा प्राप्त होती है।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
