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नाग पंचमी के दिन शिवलिंग पर नाग-चंद्रेश्वर श्रृंगार करने का क्या है महत्व? पढ़ें पूजा से जुड़े जरूरी नियम

Published: Sat, 15 Aug 2026 07:48 PM (IST)

नाग पंचमी पर भगवान शिव और नाग देवता की पूजा के लिए नाग-चंद्रेश्वर श्रृंगार का विशेष महत्व है। यह श्रृंगार ...और पढ़ें

नाग-चंद्रेश्वर श्रृंगार की विधि । (Picture Credit- AI Generated)

नाग-चंद्रेश्वर श्रृंगार की विधि । (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. नाग पंचमी पर नाग-चंद्रेश्वर श्रृंगार का विशेष महत्व।

  2. कालसर्प दोष से मुक्ति और सुख-शांति की प्राप्ति।

  3. उज्जैन महाकालेश्वर में विशेष रूप से होता है यह श्रृंगार।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नाग पंचमी का पर्व भगवान शिव और नाग देवता की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन शिवलिंग का नाग-चंद्रेश्वर श्रृंगार करने की परंपरा काफी लोकप्रिय है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग-चंद्रेश्वर रूप में भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को भगवान शिव और नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही कालसर्प दोष से मुक्ति और जीवन में सुख-शांति की कामना की जाती है। चलिए हम आपको इस श्रृंगार का महत्‍व और विधि बताते हैं।

उज्जैन में होता है विशेष नाग-चंद्रेश्वर श्रृंगार

उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में नाग पंचमी के अवसर पर नाग-चंद्रेश्वर श्रृंगार का विशेष महत्व है। इस अवसर पर भगवान शिव के नाग-चंद्रेश्वर स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है।

नाग-चंद्रेश्वर पूजा का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी पर शिवलिंग का नाग-चंद्रेश्वर श्रृंगार करने से कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करने में सहायता मिल सकती है। मान्यता है कि इस पूजा से भगवान शिव और नाग देवता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा घर में सुख-शांति और धन-वैभव बनाए रखने के लिए भी लोग इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा करते हैं।

नाग-चंद्रेश्‍वर श्रृंगार कैसे करें?

  • सबसे पहले पूजा स्थल और शिवलिंग को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव का ध्यान करें।
  • तांबे या पीतल के पात्र से शिवलिंग पर जल अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा के साथ दूध से अभिषेक कर सकते हैं।
  • शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं। इसके बाद परंपरा के अनुसार ताजी भांग और सिंदूर अर्पित करें।
  • भगवान शिव का चांदी या अन्‍य किसी शुभ धातु के शेषनाग मुकुट और रजत मुंडमाला से श्रृंगार करें। रुद्राक्ष की माला भी अर्पित करें।
  • शिवलिंग पर सुगंधित ताजे फूलों की माला चढ़ाएं। इसके साथ श्रद्धापूर्वक बेलपत्र अर्पित करें।
  • पूजा के बाद ऋतुफल, मिष्ठान्न और नारियल भगवान शिव को भोग के रूप में अर्पित करें।
  • धूप और दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें। इस दौरान मन को शांत रखें और श्रद्धा से पूजा करें।
  • मंत्र जाप: अंत में ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करें।

अत: नाग पंचमी पर नाग-चंद्रेश्वर श्रृंगार और भगवान शिव की पूजा श्रद्धा के साथ करने से भक्त आध्यात्मिक शांति की कामना करते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है