Monday Motivation: विनम्रता किसी भी इंसान का सबसे बड़ा गहना है। आपकी विनम्रता आपके बिगड़े काम बना सकती है। वहीं विनम्रता से दूर व्यक्ति के बने बनाए काम बिगड़ सकते हैं। जागरण आध्यात्म के मंडे मोटिवेशन में आज हम विनम्रता को लेकर दुनिया भर के महान लोगों के ने क्या कुछ कहा है, ये जानने की कोशिश करते हैं।

स्माइल्स कहते हैं कि नम्रता का प्रभाव दूर तक जाता है और व्यय भी कुछ नहीं होता।

मारकस औरेलियस कहते हैं- अपनी नम्रता का घमंड करने से निंदनीय और कुछ नहीं है।

फ्रैंकिलन का कहना है कि नम्रता में प्रभू यीशु और सुकरात का अनुसरण किया जा सकता है।

बालगंगाधर तिलक का कहना था कि नम्रता, प्रेमपूर्ण व्यवहार तथा सहनशीलता से मनुष्य तो क्या, देवता भी तुम्हारे वश में हो जाते हैं।

सर टी मूर के शब्द उधार लें, तो नम्रता की व्याख्या कुछ यूं मिलती है- बड़ों के प्रति नम्रता कर्तव्य है, बराबर वालों के प्रति विनयसूचक है, छोटों के प्रति नम्रता समस्त गुणों की आधारशिला है।

कन्फ्यूशियस ने अपनी बात बहुत ही छोटे और सटीक शब्दों में कही है। वो कहते हैं- कभी न टूटने वाला एक कवच है- नम्रता।

जॉन रस्किन के विचार जानते हैं। वो कहते हैं कि मेरा विश्वास है कि किसी महान व्यक्ति की प्रथम परीक्षा उसकी नम्रता ही है।

कालिदास भी लम्बे समय पहले विनम्रता पर अपने विचार लिख गए हैं। महाकाव्यों के रचियता कालिदास कहते हैं कि फल के आने से वृक्ष झुक जाते हैं। बारिश की ऋतु में बादल झुक जाते हैं। सम्पत्ति अपार होने के बावजूद भी सज्जन नम्र होते हैं। परोपकारियों की विनम्रता ऐसी ही होती है। वो हर समय ऐसे ही विनम्र बने रहते हैं।

बाइबिल में विनम्रता का उल्लेख है। बाइबल में कहा गया है कि गर्व का अंत विनाश में होता है। विनम्रता का अंत सम्मान में होता है। कहने का अर्थ है कि हर हाल में विनम्र बने रहिए।

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