Monday Motivation: आज सोमवार है। सोमवार की शुरुआत हफ्ते की शुरुआत होती है तो क्यों न कुछ सकारात्मक बातों के साथ आज के दिन की शुरुआत हो ताकि ये पूरा हफ्ता आप पॉजिटिव एनर्जी से लबरेज रहें।

गौतम बुद्ध ने कहा है- उदार मन वाले विभिन्न धर्मों में सत्य देखते हैं। संकीर्ण मन वाले केवल अंतर देखते हैं। बुद्ध का ये वाक्य आज भी समसामयिक है। कारण ये कि पूरी दुनिया में अलग-अलग लोग अलग-अलग धर्मों को मानते हैं। विवाद तभी होता है जब हम अंतर तलाशने लगते हैं, धर्मों के सत्यों को देखेंगे तो सभी धर्म एक से नजर आएंगे।

इसी पर रहस्यवाद के महान कवि कबीरदास जी गजब का मार्ग दिखला रहे हैं। दूसरों धर्मों में कमियां तलाशने वाले जरा अपने में भी झांके। कबीर दास जी कहते हैं—

कबिरा आप ठगाइये और न ठगिये कोय।

आप ठगे सुख होत है, और ठगे दुख होय॥

यहां कबीर कह रहे हैं कि आप ठगा जाइए कोई गम नहीं, पर दूसरों को मत ठगिए। वो सबसे बड़ा पाप है।

विवेकानंद जी भी स्वयं के व्यक्तित्व को महान बनाने का रास्ता दिखाते हुए कहते हैं कि मनुष्य की महानता उसके कपड़ों से नहीं, बल्कि उसके चरित्र से आंकी जाती है। विवेकानंद जी ने पूरी दुनिया को धर्म का पाठ पठाया था। इस कथन से उनका आशय ये था कि कपड़े नहीं चरित्र मूल्यवान और साफ सुथरा होना चाहिए। बहुत से लोग अंदर से मैले होते हैं और बाहर उजले कपड़े पहन कोशिश करते हैं कि चकाचौंध रहे, पर ऐसे लोग ज्यादा देर टिक नहीं पाते। दुनिया उनके चरित्र से उन्हें पहचान लेती है।

रवीन्द्र नाथ टैगोर के शब्द उधार लें तो वो कहते हैं आदर्श के दीपक को पीछे रखने वाले अपनी ही छाया के कारण अपने पथ को अंधकारमय बना लेते हैं। टैगोर का कहना है कि जीवन में आदर्श बनाए जाने बहुत जरूरी हैं। आदर्श के दीपक से तात्पर्य उस तेज से जो आदर्शवान पुरुष के व्यक्तित्व से निकलता दिखता है।

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