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मीनाक्षी-सुंदरेश्वर से गौरी शंकर तक: भारत के अलग-अलग राज्यों में भगवान शिव और माता पार्वती के प्रमुख नाम  

Published: Sun, 05 Jul 2026 12:30 PM (GMT+05:30)

भारत के विभिन्न राज्यों में भगवान शिव और माता पार्वती को अलग-अलग नामों से पूजा जाता है। यह विविधता सांस्कृतिक ...और पढ़ें

अलग-अलग राज्यों में भगवान शिव और माता पार्वती का नाम (Picture Credit: AI Generated)

अलग-अलग राज्यों में भगवान शिव और माता पार्वती का नाम (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव के साथ हमेशा माता पार्वती का नाम सम्मानपूर्वक और भक्ति के साथ लिया जाता है। शिव और शक्ति का मिलन संपूर्णता का प्रतीक माना जाता है। भक्त माता पार्वती और भगवान शिव को कई नामों से पुकारते हैं।

कोई उन्हें उमापति कहता है, तो कोई उन्हें गौरी शंकर के रूप में पूजता है। बेशक दोनों का नाम बदल जाता है, लेकिन भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़े हर एक नाम में भक्ति का पूर्ण एहसास रहता है। क्या आपको पता है कि, विभिन्न राज्यों में भगवान शिव और माता पार्वती को किन नाम से पुकारा जाता है? आइए जानते हैं।

अलग-अलग राज्यों में भगवान शिव और माता पार्वती के प्रमुख नाम

तमिलनाडु- मीनाक्षी सुंदरेश्वर

आंध्र प्रदेश- भगवान शिव को मल्लिकार्जुन और माता पार्वती को भ्रमराम्बा के नाम से पूजा जाता है।

उत्तर प्रदेश में भगवान शिव को विश्वनाथ और माता पार्वती को अन्नपूर्णा के नाम से पूजा जाता है।

महाराष्ट्र राज्य में भगवान शिव खंडोबा नाम से पूजा जाता है, जबकि माता पार्वती को महालसा देवी के नाम से पूजा जाता है।

तमिलनाडु में भगवान शिव और माता पार्वती को अर्धनारीश्वर के रूप में पूजा जाता है।

रामेश्वरम में भगवान शिव रामनाथस्वामी और माता पार्वती को पार्वतीवर्धिनी के नाम से पूजा जाता है।

गुजरात राज्य में भगवान शिव नागेश्वर और माता पार्वती को नागेश्वरी के रूप में पूजा जाता है।

तेलंगाना में भगवान शिव को राजराजेश्वर और माता पार्वती को राजराजेश्वरी के रूप में पूजा जाता है।

अलग नाम होने के पीछे क्या है खास कारण?

भारत में भगवान शिव और माता पार्वती को अलग-अलग नामों से बुलाए जाने के पीछे कई कारण हैं। इसमें सांस्कृतिक विविधता, स्थानीय भाषा और क्षेत्रीय पौराणिक कथाएं अहम भूमिका अदा करती हैं। ईश्वर एक ही हैं, लेकिन भक्त उनकी पूजा भौगोलिक और सांस्कृतिक परिवेश के अनुसार करना पसंद करते हैं।

जहां दक्षिण भारत की पौराणिक कथाओं और भाषाओं के प्रभाव के कारण उन्हें सुंदरेश्वरी-मीनाक्षी के नाम से पूजा जाता है, जबकि महाराष्ट्र में लोक देवता खंडोबा और महालसा के रूप में पूजा जाता है। उज्जैन में अपने उग्र स्वरूप के कारण उन्हें महाकाल के रूप में पूजा जाता हैं, तो शक्तिपीठों की मान्यताओं के आधार पर मां पार्वती को कामाख्या या अंबा जैसे नाम से बुलाया जाता है।

नाम से जुड़ी यह विविधता शिव (कल्याण) और शक्ति (ऊर्जा) भारत की अनेकता में एकता का सबसे सुंदर उदाहरण है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।