Lakshmi Panchami Vrat Katha: आज लक्ष्मी पंचमी है और आज के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन पूजा करते समय व्यक्ति को उनकी आरती और मंत्रों का जाप भी करना चाहिए। साथ ही लक्ष्मी पंचमी व्रत कथा भी पढ़नी चाहिए। तो आइए पढ़ते हैं यह व्रत कथा।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार मां लक्ष्मी देवताओं से रूठ गईं थीं और वो श्री सागर में जा मिलीं। मां लक्ष्मी के चले जाने से सभी देवता श्री विहीन हो गए। फिर देवराज इंद्र ने मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के बारे में सोचा। इंद्र ने मां को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की। साथ ही विशेष विधि विधान के साथ पूजा और उपवास भी किया। जिस तरह से देवराज इंद्र ने मां की अराधना की उसका अनुसरण करते हुए अन्य देवी देवताओं ने भी मां लक्ष्मी का उपवास रखा।

देवताओं को देख असुरों ने मां लक्ष्मी की अराधना शुरू कर दी। मां लक्ष्मी अपने भक्तों की भक्ति से बेहद प्रसन्न हो गईं और व्रत समाप्ति के पश्चात पुन: उत्पन्न हुईं। इसके बाद भगवान श्री हरि विष्णु से उनका विवाह संपन्न हुआ। देवगण एक बार फिर से श्री की कृपा पाकर धन्य हो गए। जिस तिथि को मां पुन: उत्पन्न हुई थीं वह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। यही कारण है कि यह तिथि लक्ष्मी पंचमी के नाम से जानी जाती है। यह दिन इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि यह दिन नवरात्रि से भी पांचवां दिन माना जाता है।

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