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'नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की...' जन्माष्टमी पर गूंजने वाले इस जयकारे में छिपा है कृष्ण जन्म से जुड़ा रहस्य

Published: Fri, 04 Sep 2026 12:07 PM (IST)

जन्माष्टमी (Janmashtami 2026) पर गूंजने वाले "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" जयकारे का गहरा अर्थ है। यह ...और पढ़ें

नंद के आनंद भयो...' जयकारे का असली अर्थ क्या है (AI-Generated Image)

नंद के आनंद भयो...' जयकारे का असली अर्थ क्या है (AI-Generated Image) 

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में जन्माष्टमी (Janmashtami 2026) के पर्व का विशेष महत्व है। यह दिन लड्डू गोपाल को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए इस तिथि पर हर साल जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार यह पर्व आज यानी 4 सितंबर को मनाया जा रहा है। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के कई सुंदर भजन सुनने को मिलते हैं। जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल के जन्म के समय हर तरफ "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" (Nand Ke Anand Bhayo Jai Janhaiya Lal) के जयकारे लगते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस जयकारे का असली अर्थ क्या है? अगर नहीं पता, तो आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं इस भजन के अर्थ और महत्व के बारे में।

krishna janmashtami 2026

(AI-Generated Image) 

क्या है अर्थ

जन्माष्टमी के अवसर पर "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" यह पंक्ति खूब सुनने को मिलती है। इसे उत्सव का प्रतीक माना जाता है। यह भजन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में गाया जाता है। इस पंक्ति का अर्थ है कि नंद बाबा के घर में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया है और ब्रजवासी प्रभु की जय-जयकार कर रहे हैं।

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इस पंक्ति के द्वारा ब्रजवासी भगवान श्रीकृष्ण के धरती पर अवतरित होने की घोषणा कर रहे हैं। नंद बाबा के घर आनंद होने की खुशी में लोग भजन गा रहे हैं और नृत्य कर रहे हैं। ब्रजवासी जब नंद बाबा और माता यशोदा को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की बधाई देने आते हैं, तो वे इसी भजन के द्वारा उन्हें बधाई देते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तो पिता वसुदेव जी उन्हें कंस से बचाने के लिए रात में यमुना नदी को पार करके नंद बाबा के घर छोड़ आए थे। जब सुबह होने पर गोकुलवासियों को पता चला कि माता यशोदा और नंद बाबा के घर वर्षों बाद पुत्र का जन्म हुआ है, तो पूरे गोकुल में खुशी की लहर दौड़ गई।

इसके बाद सभी लोग दूध, दही, माखन और उपहार लेकर नंद भवन आते हैं और खुशी में एक-दूसरे को बधाइयां देते हैं। इसी दौरान लोग कई भजन गाते हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण भजन "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।