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कोकिल मास बारह वर्ष में एक बार आता है

प्रत्येक कार्य समय पर किया जाता है तो उससे कार्य में सफलता मिलती है। यू तो अधिक मास तीन साल में एक बार आता है, लेकिन कोकिल मास बारह वर्ष में एक बार आता है। इसे स्वयं भगवान ने अपने नाम से जोड़ा था। यह मास धर्म और पुण्य कार्य

By Preeti jhaEdited By: Published: Sat, 13 Jun 2015 12:24 PM (IST)Updated: Sat, 13 Jun 2015 12:41 PM (IST)
कोकिल मास बारह वर्ष में एक बार आता है

सीहोर। प्रत्येक कार्य समय पर किया जाता है तो उससे कार्य में सफलता मिलती है। यू तो अधिक मास तीन साल में एक बार आता है, लेकिन कोकिल मास बारह वर्ष में एक बार आता है। इसे स्वयं भगवान ने अपने नाम से जोड़ा था। यह मास धर्म और पुण्य कार्य करने के लिए सर्वोत्तम होता है क्योंकि इस माह में पूजन-पाठ करने से अधिक पुण्य मिलता है। इस माह में श्राद्घ, स्नान और दान से कल्याण होता है। यह वचन शहर के बड़ा बाजार में स्थित अग्रवाल भवन में जारी विट्ठलेश सेवा समिति के तत्वाधान में कोकिल अधिक मास कथा महोत्सव के दौरान भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे। शुक्रवार को कथा में अनेक एकादशी के महत्व को बताया गया। उन्होंने कहा कि आषाढ़ कृष्ण एकादशी का नाम योगिनी है। इसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यह इस लोक में भोग और परलोक में मुक्ति देने वाली है।

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इसलिए एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। कथा के दौरान श्री मिश्रा ने दान-पुण्य के बारे में बताया मनुष्य जीवन में दान का बड़ा महत्व होता है। मनुष्य को जीवन में पांच प्रकार के दान अवश्य करना चाहिए। अन्नदान, स्थल दान, भाव दान, ज्ञान दान एवं धर्म दान जरूर करना चाहिए। यहां पर मौजूद माता और विद्यार्थियों को कथा महोत्सव के दौरान श्री मिश्रा ने कहा कि जिसके जीवन में गुरु नहीं होता, उसका जीवन शुरू ही नहीं होता है। मानव जीवन में आध्यात्मिक विकास, अच्छे संस्कारों के निर्माण के लिए अच्छे गुरू का समागम होना आवश्यक है। मोक्ष का सुख निरोगी जैसा है। मोक्ष में खाने-पीने या विलासिता के लिए कोई साधन नहीं है। लेकिन मोक्ष का सुख आनंददायी है। मोक्ष के लिए साधना करना पड़ती है। विट्ठलेश सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि कोकिला अधिक मास की कथा दोपहर दो बजे से पांच बजे तक बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल भवन में चल रही है।


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