शीतला अष्‍टमी का पर्व

होली के बाद आने वाली अष्‍टमी को शीतला अष्‍टमी का पर्व मनाया जाता है, लेकिन कुछ स्थानों पर यह होली के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार या शुक्रवार को भी मनाई जाती है। शीतला अष्टमी उत्तरी भारत में माता शीतला को समर्पित है। शीतला माता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी की पूजा की जाती है। जहां उत्तर भारत में जहां उन्‍हें माता शीतला के नाम से जाना जाता है वहीं दक्षिण भारत में इनकी देवी पोलरम्‍मा और देवी मारियम्‍मन के नाम से पूजा जाता है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में भी शीतला अष्टमी का पूजन किया जाता है जिसे पोलाला अमावस्या कहते हैं। परम्परा के अनुसार इस पूजा के लिए इस अष्‍टमी पर घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता और पूरे परिवार को एक दिन पहले बने हुए बासी भोजन का सेवन करना होता है। 

ये है मुहूर्त

पंडित दीपक पांडे ने बताया कि शीतला अष्टमी 9 मार्च 2018, शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी। और इसकी पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 06:41 बजे से सायं 06:21 बजे तक है। 9 तारीख को अष्‍टमी प्रातः 03:44 बजे से लगेगी और 10 मार्च 2018, शनिवार को प्रातः 06:00 बजे तक रहेगी। इस दिन के लिए बसौड़ा यानि भोजन 8 मार्च 2018 को ही बनाया जायेगा। 

शीतला माता का स्‍वरूप

पौराणिक मान्यतानुसार शीतला माता चतुर्भुजी हैं जिनके एक हाथ में झाड़ू, दूसरे में कलश है, जबकि तीसरा हाथ वर मुद्रा में और चौथा अभय मुद्रा में रहता है। वे पीला और हरा वस्‍त्र धारण करती हैं। माता की सवारी गधा है। उनके हाथ की झाड़ू सफाई का और कलश जल का प्रतीक है। ऐसी मान्‍यता है कि झाड़ू से अलक्ष्मी व दरिद्रता दूर होती है जबकि कलश में धन कुबेर का वास होता है। माता शीतला अग्नि तत्व की विरोधी हैं, अतः इस दिन भोजन घर में चूल्हा नहीं जलतता और भोजन एक दिन पहले बन जाता है। अष्टमी पर शीतला पूजन बाद सभी बासी भोजन खाते हैं। ये एकमात्र ऐसा व्रत है जिसमें बासी भोजन चढ़ाया व खाया जाता है। 

 

Posted By: Molly Seth