कृष्ण की बाल लीला से जुड़ी कथा   

भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं में गोवर्धन पर्वत को नख पर उठाने की उनकी यह लीला काफी चर्चित है। श्रीकृष्ण जब सुबह सोकर उठे तो देखा कि उनकी यशोदा मैया अपने मुंह पर पट्टी बांधकर कई तरह के पकवान बना रही हैं। कन्हैया ने तब पकवान खाने को मांगे तो यशोदा जी ने मना कर दिया। इस पर बाल कृष्ण नंद बाबा के पास पहुंचे और रोने लगे। नंद बाबा ने जब कारण जाना तब उन्होंने इसके पीछे की वजह बताई। उन्होंने बताया कि इंद्र हम सब के देवता हैं, बादल और वर्षा उनके ही रूप हैं। जब हम उनकी पूजा करते हैं और कई प्रकार के पकवानों का भोग उन्हें लगाते हैं तो वे प्रसन्न होते हैं। वे प्रसन्न होकर वर्षा करते हैं, जिससे यह धरती हरी—भरी हो जाती है। फसलें लहलहाती हैं। इस पर कान्हा ने कहा कि नंद बाबा जीव का जन्म कर्म से होता है, जो कर्म करते हैं ईश्वर उन्हीं को फल भी देते हैं। हम सब के देवता तो गिरिराज गोवर्धन नाथ हैं, हमें तो उनकी पूजा करनी चाहिए। 

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नख पर पर्वत 

इस पर केशव ने नंद बाबा से कहा कि अगर हम गोवर्धन की पूजा करेंगे तो वह प्रसन्न होंगे और वे इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा भी करेंगे। कान्हा की बात से सहमत होकर सभी ब्रजवासियों ने गोवर्धन जी की पूजा की। जब इंद्र को इस बात की सूचना मिली तो वह नाराज हो गए। फलस्वरूप उन्होंने सात दिनों तक भारी वर्षा की, जिससे ब्रजवासियों की संकट बढ़ने लगी। इस पर श्रीकृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपने नख पर उठा लिया, जिससे समस्त ब्रजवासी गोवर्धन जी की शरण में आग गए। उनको इंद्र के प्रकोप से राहत मिली और इंद्र का घमंड में चूर हो गया। उन्होंने इसके लिए श्रीकृष्ण और ब्रजवासियों से क्षमा भी मांगी। तभी से अन्नकूट या गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को होता है। इस दिन वेदों में इंद्र, वरुण, अग्नि आदि देवताओं की पूजा का विधान है। इस दिन महिलाएं गोवर्धन की पूजा करके सुख और समृद्धि की कामना करती हैं।

 

Posted By: Molly Seth