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गुरू का राशि परिवर्तन 

सोमवार 22 अप्रैल से बृहस्पति गुरू अपना राशि परिवर्तन कर रहे हैं। बृहस्पति धनु से निकल कर सायंकाल वृश्चिक में प्रवेश कर रहे हैं। इस स्थान पर वे 5 नवंबर 2019 तक रहेंगे।  देव गुरु बृहस्पति का इस प्रकार राशि परिवर्तन उथल-पुथल का कारक माना जा रहा है। पंडित जी का कहना है कि ये परिवर्तन भारत में मतदान पर अत्यधिक प्रभाव डाल सकता है। अब मतदान का प्रतिशत कहीं ना कहीं बढ़ेगा, साथ ही इस काल खंड में विवाह आदि भी संपन्न होंगे और सामाजिक स्तर में भी सुधार होगा। ज्योतिष के अनुसार महिलाओं का सम्मान करने वालों एवम् माता-पिता के चरण छूने वालों पर गुरु की विशेष कृपा बरसेगी और रुके हुए कार्य सफल होंगे।

क्या होंगे प्रभाव

गुरु के वृश्चिक राशि में प्रवेश करने से राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में परिवर्तन कर आएंगे। कानून व्यवस्था एवं सुरक्षा की दृष्टि से प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसी के साथ साथ क्षेत्र का एवं सांप्रदायिकता जैसी समस्याएं मुखर होंगी और आर्थिक क्षेत्र में आकस्मिक उतार-चढ़ाव होगा। इस बात की भी पूरी संभावना है कि गुरु के परिवर्तन से संचार के साधनों में मोबाइल इंटरनेट आदि में भारत विकास करेगा। इंजीनियरिंग, तकनीकी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत उल्लेखनीय प्रगति करेगा। इस दौरान देश में कई ऐसे कार्य होंगे जिससे विश्व भर में भारत अपनी एक अलग पहचान बनाएगा। विवाह का कारक गुरु कन्या की जन्मपत्रिका में पति का कारक माना गया है। गुरु की उत्तम स्थिति तथा कन्या के सही आयु वर्ग में उत्तम दिशाओं का आना कन्या के शुभ विवाह को दर्शाता है। ऐसे में मन अनुकूल वर की प्राप्ति होती है तथा दांपत्य जीवन श्रेष्ठ होता है। गुरु के वृश्चिक राशि पर आने पर विवाह में आ रही रुकावटें भी समाप्त होती हैं।

कैसे करें गुरु ग्रह को प्रसन्न 

इस अवधि में बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए ब्राह्मणों का सम्मान करें, दिन माता पिता के चरण स्पर्श करें, महिलाओं का सम्मान करें और गुरुजनों व बुजुर्गों का आशीर्वाद लें। साधुओं की संगत करें साथ ही नियंत्रण एवं धर्म मार्ग से अर्जित धन का ही उपयोग करें। इस समय पर सोने का दान अत्यंत लाभकारी माना जाता है। चने की दाल गाय को खिलाएं। शहद और मुलेठी को पानी में डालकर स्नान करें। ज्योतिष के अनुसार पीले रंग की वस्तु पर गुरु का आधिपत्य होता है इसलिए पीली वस्तु और वस्त्र धारण करने के साथ उनका दान भी करें। गुरू को सर्वाधिक शुभ ग्रह माना जाता है, इसकी दृष्टि अमृत मानी जाती है और सर्वाधिक कल्याणकारी होती है। यदि गुरु लग्न भाव में स्थित होकर व्यक्तित्व का कारक बने तो ऐसा व्यक्ति लंबी चौड़ी कल काठी वाला गंभीर व्यक्तित्व, भूरे बालों वाला और बुद्धिमान होता है।

जानें बृहस्पति ग्रह को 

ज्योतिष शास्त्र में गुरु यानि बृहस्पति ग्रह का स्थान बहुत बड़ा है। इसे समस्त देवताओं का गुरु माना जाता है। गुरु ज्ञान के सलाह के दाता हैं।यदि आपकी कुंडली में गुरु शुभ हैं तो आपको विकट परिस्थितियों में भी आपका कार्य होता रहता है। कर्क राशि में बृहस्पति उच्च के और मकर राशि में निकृष्ट माने जाते हैं। ये धनु व मीन राशि के स्वामी हैं। सूर्य, चंद्रमा व मंगल के साथ इनकी मित्रता है और शुक्र व बुध के साथ ये शत्रु रहते हैं। राहु-केतु व शनि के साथ इनका संबंध तटस्थ है। बृहस्पति की खासियत है कि ये शत्रु से भी दुष्टता नहीं करते और अधिकतर ग्रहों से तटस्थ रिश्ता रखते हैं। गुरु विवेकशील ग्रह माने जाते हैं। इन्हें संपत्ति व ज्ञान का कारक भी माना गया है। 

Posted By: Molly Seth

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