कजरी तीज का व्रत कब और कैसे खोलें? तुरंत पढ़ें सही नियम, वरना नहीं मिलेगा पूजा का पूर्ण फल
कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त को मनाया जाएगा, जिसमें सुहागिनें और कुंवारी कन्याएं मनचाहे जीवनसाथी व खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए उपवास रखती हैं।
-1787396613783_m.webp)
कजरी तीज व्रत पारण के नियम (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कजरी तीज के पर्व का सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं बेसब्री से इंतजार करती हैं। कजरी तीज को बड़ी तीज या सातूड़ी तीज भी कहा जाता है। हर साल यह व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार यह पर्व 31 अगस्त (Kajari Teej 2026 Date) को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। साथ ही वैवाहिक जीवन भी खुशियों से भरा रहता है।
ऐसा माना जाता है कि इस व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब व्रत के दौरान नियमों का सही से पालन किया जाए और व्रत का पारण सही समय पर हो। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि कजरी तीज का व्रत खोलने का सही समय और नियम क्या हैं?
कबखोलें कजरी तीज का व्रत?
कजरी तीज (Kajari Teej 2026 Vrat Paran) का व्रत निर्जला रखा जाता है। शाम के समय पूजा-अर्चना करने और चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। अगर मौसम खराब होने की वजह से चंद्रमा दिखाई न दे, तो पंचांग में दिए गए चंद्रोदय के समय के अनुसार आसमान की ओर मुख करके चंद्रमा को अर्घ्य दें। इस दौरान चंद्र देव के मंत्रों का ध्यान करें। चंद्रमा न दिखाई देने पर अर्घ्य देने के लिए आप किसी ज्योतिषी की सलाह भी ले सकती हैं।
-1787396686476.webp)
(Picture Credit- AI Generated)
कजरी तीज व्रत पारण की विधि
- कजरी तीज के दिन शाम को नीमड़ी माता के संग महादेव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करें।
- शाम को चंद्रमा के निकलने पर उन्हें अर्घ्य दें।
- एक बात का विशेष ध्यान रखें कि चंद्र देव को अर्घ्य देते समय चांदी, पीतल या मिट्टी के लोटे का ही इस्तेमाल करें। अर्घ्य के जल में कच्चा दूध, अक्षत और गंगाजल जरूर मिलाएं।
- व्रत खोलने से पहले पति, सास-ससुर और घर के अन्य बड़ों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद जरूर लें। ऐसा माना जाता है कि बड़ों का आशीर्वाद लेने से व्रत सफल होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
- कजरी तीज को 'सातूड़ी तीज भी कहा जाता है। इसलिए इस व्रत का पारण सत्तू खाकर ही किया जाता है। सत्तू खाने के बाद आप सात्विक भोजन ग्रहण कर सकती हैं।
कजरी तीज पर क्या न करें?
व्रत के दौरान किसी से भी वाद-विवाद न करें।
मन में किसी के प्रति गलत या नकारात्मक विचार न लाएं।
पूजा और व्रत के दौरान काले रंग के कपड़े भूलकर भी धारण न करें।
किसी पर क्रोध न करें और वाणी में मधुरता बनाए रखें।
तामसिक चीजों का सेवन न करें।
यह भी पढ़ें- 31 अगस्त को बन रहा है 3 प्रमुख व्रतों का महासंयोग, जानिए कजरी तीज, बहुला चौथ और संकष्टी चतुर्थी का महत्व
यह भी पढ़ें- कजरी तीज की आरती में भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना अधूरा रह जाएगा व्रत का फल
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
