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काजल सिर्फ सुंदरता ही नहीं, बुरी नजर का ढाल भी: जानिए इस मान्यता के पीछे का सच और महत्व

Published: Sat, 05 Sep 2026 05:30 PM (IST)Updated: Tue, 08 Sep 2026 09:18 AM (IST)

काजल का उपयोग भारतीय संस्कृति में बुरी नजर से बचाव के लिए एक पारंपरिक उपाय के रूप में किया जाता ...और पढ़ें

बच्चों की सुरक्षा के लिए काले टीके की परंपरा (Picture Credits- AI Images)

बच्चों की सुरक्षा के लिए काले टीके की परंपरा (Picture Credits- AI Images)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। काजल हममें से ज्यादातर लोगों ने बचपन से ही देखा है। कुछ लोगों के लिए यह सिर्फ आंखों को गहरा और खूबसूरत दिखाने का एक तरीका हो सकता है, लेकिन कई भारतीय परिवारों में काजल का एक और भी महत्व है।

गाल पर, कान के पीछे, माथे पर या पैर पर लगाई जाने वाली एक छोटी काली बिंदी अक्सर बुरी नजर से बचाव के लिए प्रयोग की जाती है। हमने कभी न कभी अपनी मां या दादी को ऐसा करते देखा होगा और सोचा होगा कि ऐसा क्यों? इसका जवाब एक बहुत पुरानी मान्यता में छिपा है जिसका पालन आज भी किया जाता है।

नजर या बुरी नजर क्या है?

नजर वह मान्यता है जिसके मुताबिक किसी की ईर्ष्या, जलन या अधिक प्रशंसा भी दूसरे व्यक्ति पर नकारात्मक प्रभाव दिखा सकती है। उदाहरण के लिए जब कोई व्यक्ति बहुत अच्छा कर रहा हो, सुंदर दिख रहा हो या उसे वह मिल जाए जो वह हमेशा से चाहता था, तो लोग कहते हैं 'नजर लग जाएगी।'

यह मान्यता केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर की कई संस्कृतियों में बुरी नजर के बारे में अपने-अपने विचार और उससे बचाव के तरीके हैं।

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लोग नजर के लिए काजल क्यों इस्तेमाल करते हैं?

इसका एकदम सरल जवाब है कि कई लोग की मान्यता है कि, काजल एक सुरक्षात्मक चिह्न का काम करता है। ऐसा माना जाता है कि यह छोटा काला बिंदु नजर के प्रभाव को कम करता है और उससे बचाता है।

कुछ लोगों का मानना है कि, काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है, जबकि अन्य लोगों का मानना है कि एक छोटा चिह्न व्यक्ति को कम परिपूर्ण दिखाता है और इसलिए बुरी नजर लगने की संभावना कम हो जाती है।

शिशुओं का संबंध काला टीका से

लोग अक्सर काजल और नजर को शिशुओं से जोड़ते हैं, लेकिन यह परंपरा सिर्फ शिशुओं तक सीमित नहीं है। बड़े भी पीढ़ियों से सुरक्षा के लिए काजल और काली बिंदी का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। उदाहरण के लिए शादी के बाद कोई दुल्हन के चेहरे पर एक छोटी काली बिंदी लगा सकता है।

यदि किसी व्यक्ति को नई नौकरी मिलती है, नई कार खरीदता है या कोई महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करता है, तो परिवार का कोई सदस्य 'नजर न लगे' कहकर उसके चेहरे पर कहीं एक छोटा काला निशान लगा सकता है।

काले रंग को सुरक्षात्मक क्यों माना गया है?

कई परंपराओं में काले रंग को सुरक्षात्मक शक्तियों से युक्त माना जाता है। कुछ लोगों का मानना है कि, काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है। वहीं कुछ अन्य लोगों का मानना है कि काला निशान व्यक्ति की सुंदरता या सफलता से ध्यान हटा देता है।

यह धारणा काफी सरल है। अगर कोई व्यक्ति दिखने में एकदम सही है और उसे काफी ज्यादा ध्यान मिलता है तो माना जाता है कि वह छोटा-सा काला निशान उस खूबसूरती को तोड़ देता है और उस व्यक्ति को नजर से बचाता है। बेशक यह एक पारंपरिक मान्यता है और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है।

इस परंपरा की उत्पत्ति कहां से हुई

काजल इतिहास काफी पुराना माना जाता है। हजारों साल पहले प्राचीन मिस्र में इसी तरह के उत्पाद जिन्हें कोल के नाम से जाना जाता था, प्रयोग में लाई जाती थी। बाद में कोल मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के विभिन्न हिस्सों में आम हो गया।

बीतते समय के साथ अलग-अलग समुदायों ने काजल को अपने-अपने अर्थ दिए। भारत में यह सुंदरता के साथ-साथ कई पारंपरिक मान्यताओं से भी जुड़ा है। नजर के साथ इसका संबंध कई परिवारों और समुदायों का हिस्सा बन गया। इसका सटीक इस्तेमाल भले ही अलग हो लेकिन सुरक्षा के लिए काले निशान का उपयोग करने का मूल विचार आज भी प्रचलित है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।