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जगन्नाथ रथ यात्रा 2026: पुण्य और मोक्ष की राह है रथ खींचने की परंपरा, जानें इस बार का पूरा शेड्यूल

Published: Sun, 17 May 2026 02:02 PM (GMT+05:30)

जगन्नाथ रथ यात्रा कब शुरू होगी? आइए इसकी तिथि, महत्व और प्रमुख अनुष्ठान जानते हैं।

Jagannath Puri Rath Yatra 2026: जगन्नाथ रथ यात्रा कब शुरू होगी?

Jagannath Puri Rath Yatra 2026: जगन्नाथ रथ यात्रा कब शुरू होगी?

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि श्रद्धा और भक्ति का महाकुंभ है। हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को महाप्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नगर यात्रा और अपनी मौसी के घर गुंडीचा मंदिर जाने के लिए निकलते हैं।

सनातन परंपरा में माना जाता है कि जो भी श्रद्धालु इस रथ यात्रा में शामिल होकर रथ को खींचते हैं, उसे जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए इस साल यह भव्य रथ यात्रा कब शुरू होगी? आइए जानते हैं।

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रथ यात्रा 2026 का पूरा शेड्यूल

  • 16 जुलाई 2026 (गुरुवार) - रथ यात्रा का शुभारंभ, महाप्रभु गुंडीचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे।
  • 17 जुलाई से 23 जुलाई 2026 - भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी गुंडीचा मंदिर में विश्राम करेंगे और भक्तों को दर्शन देंगे।
  • 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) - बहुदा यात्रा यानी भगवान की अपने मुख्य मंदिर में वापस लौटेंगे।

रथ यात्रा का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस यात्रा के जरिए भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर यानी गुंडीचा मंदिर जाते हैं। यहां तीनों भाई-बहन लगभग 9 दिनों तक आराम करते हैं। स्कंद पुराण में बताया गया है कि रथ यात्रा के दौरान श्रीहरि के मुख्य रथ 'नंदीघोष' के दर्शन मात्र से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

रथ खींचने की परंपरा को लेकर मान्यता है कि महाप्रभु खुद अपने भक्तों को दर्शन देने राजमहल से बाहर आते हैं, इसलिए उनके रथ को आगे बढ़ाना सीधे मोक्ष की राह पर कदम बढ़ाने जैसा है।

प्रमुख अनुष्ठान

रथ यात्रा की शुरुआत से पहले कई पारंपरिक अनुष्ठान किए जाते हैं। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान का महास्नान होता है, जिसके बाद वे 15 दिनों के लिए बीमार (अनासर काल) हो जाते हैं।

इसके बाद आषाढ़ द्वितीया को छेरा पहरा की रस्म होती है, जिसमें पुरी के गजपति राजा सोने की झाड़ू से रथों के मंडप को साफ करते हैं। इसके बाद ही रथ खींचने की प्रक्रिया शुरू होती है। सभी श्रद्धालु पूरी श्रद्धा से शंखध्वनि और जयकारों के बीच रथ को आगे बढ़ाते हैं।

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