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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 09, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अपरिपक्व सोच: वैश्विक चुनौती बन चुकी है धैर्य और सहिष्णुता के स्तर में गिरावट

By Kartikey TiwariEdited By:
Published: Thu, 09 Sep 2021 08:49 AM (IST)

घंटी बजाने पर द्वार तुरंत न खुलना रेस्तरां में अपेक्षित खाद्य सामग्री प्रस्तुत होने में देरी झट से उत्तर न ...और पढ़ें

अपरिपक्व सोच: वैश्विक चुनौती बन चुकी है धैर्य और सहिष्णुता के स्तर में गिरावट
अपरिपक्व सोच: वैश्विक चुनौती बन चुकी है धैर्य और सहिष्णुता के स्तर में गिरावट

घंटी बजाने पर द्वार तुरंत न खुलना, रेस्तरां में अपेक्षित खाद्य सामग्री प्रस्तुत होने में देरी, झट से उत्तर न मिलना, हार्न देने पर वाहन द्वारा मार्ग न छोड़ना जैसी स्थितियों में झुंझलाना या क्रोधित होना अपरिपक्व सोच को दर्शाता है। स्वस्थ वृत्ति का तकाजा है, उन संभावनाओं की अनदेखी न हो, जिनके कारण सामने वाला हमारे अनुकूल आचरण नहीं कर रहा।

नामालूम वह दुविधाग्रस्त या संताप में हो। हम मान लेते हैं कि वह सायास हमारी नहीं सुन रहा। किसी को समझने से पहले उसे समझाने, परखने या उसके बारे में राय बनाने का अर्थ है हमें अपनी सोच दुरुस्त करनी चाहिए। किसी के बाबत आपकी राय अधिक सटीक तब होगी जब सुदीर्घ अवधि तक उसे विभिन्न अवसरों में समझा जाए।

धैर्य और सहिष्णुता के स्तर में गिरावट वैश्विक चुनौती बन चुकी है। तनाव, उद्विग्नता और अवसाद जैसी मानसिक व्याधियों में अनवरत बढ़त हो रही है। मानसिक रोगों का इलाज लेने वालों से कहीं अधिक संख्या उन बेचारों की है, जो अपनी मानसिक व्याधि के प्रति अनजान हैं। वैचारिक उन्नति के संदर्भ में अनजान होना उतना जोखिमभरा नहीं, जितना जानने-सीखने की इच्छा न होना।

शरीर बहुत कुछ करने में समर्थ है, यह मस्तिष्क को समझाना होता है। स्वस्थ काया के बावजूद इस भ्रम में जीना कि अंग-प्रत्यंग अमुक कार्य नहीं कर सकते, वैचारिक अपंगता का लक्षण है। विचार से सुदृढ़ व्यक्ति जानता है कि प्रभु का प्रतिरूप होने के कारण वह अथाह ऊर्जा से परिपूर्ण है, जिसके समुचित दोहन से अविश्वसनीय ऊंचाइयां छुई जा सकती हैं। यह भी कि कोई पराजित तभी होता है जब पराजय को अंतिम सत्य मान लिया जाए।

खेल शारीरिक बल से अधिक मन को उत्साही और सकारात्मक मुद्रा में ढालने का है। अपने हित न जानने वाला वैचारिक रूप से पंगु है। विचार से सक्षम व्यक्ति असफल होने से नहीं डरेगा। वह दूसरों को समझते हुए उनसे मधुर संबंध बनाएगा।

हरीश बड़थ्वाल