आधा सावन बीत चुका है! 28 अगस्त से पहले इस खास 'पंचामृत' से जरूर करें शिव का रुद्राभिषेक
श्रावण मास में भगवान शिव के रुद्राभिषेक के लिए पंचामृत का विशेष महत्व है। लेख में दूध, दही, घी, शहद ...और पढ़ें

श्रावण मास में पंचामृत बनाने की विधि और महत्व

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। श्रावण मास को शुरू हुए आधे महीना बीत चुका है, ऐसे में जो लोग अभी तक भगवान शिव का पंचामृत से रुद्राभिषेक नहीं कर पाए हैं, उन्हें 28 अगस्त 2026 श्रावण मास के खत्म होने से पहले ऐसा जरूर कर लेन चाहिए।
हिंदू धर्म में पंचामृत को सबसे पवित्र और खास माना जाता है, जिसका इस्तेमाल लगभग हर तरह के धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है।
पंचामृत का महत्व
वैसे को भगवान शिव के बारे में कहा जाता है कि, उन्हें सिर्फ एक लोटा जल से ही प्रसन्न किया जा सकता है, लेकिन शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र, फल-फूल और दही चढ़ाने का अत्यंत शुभ माना जाता है।
इन्हीं पवित्र वस्तुओं में पंचामृत भी शामिल है। हिंदू धर्म में पंचामृत को चरणामृत भी कहा जाता है।
पंचामृत क्या है?
हिंदू धर्म में किसी भी तरह की पूजा या धार्मिक अनुष्ठानों में ईश्वर को पंचामृत अर्पित किया जाता है। इसे दूध, दही, घी, शहद और चीनी से मिलाकर बनाया जाता है। अधिकतर लोगों को पंचामृत के बारे में पता तो होता है, लेकिन उसे बनाने की सही विधि का ज्ञान नहीं होता है।

पंचामृत बनाने की सही विधि
1 चम्मच घी
2 चम्मच शहद
4 चम्मच शक्कर (चीनी)
8 चम्मच दही
16 चम्मच दूध
यानी 1, 2, 4, 8, 16 हर चीज पिछली से दोगुनी होनी चाहिए। और पंचामृत बनाने का यही इसका सही अनुपात है। कोशिश करें श्रावण मास के दौरान आप रोजाना शिवलिंग पर पंचामृत से जलाभिषेक करें। क्योंकि हिंदू शास्त्रों में इसे सिर्फ भोग के नजरिए से नहीं देखा जाता है, बल्कि ये 5 पवित्र चीजों का वो संगम है जो महादेव को अत्यंत प्रिय है। तो इस सावन ये छोटी-सी सेवा महादेव के लिए जरूर करें।
भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करने के बाद उसे प्रसाद के तौर पर सभी लोगों में बांटना चाहिए। इसके अलावा जिन लोगों के लिए संपूर्ण श्रावण मास में ऐसा करना संभव नहीं है, उन्हें कम से कम श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को तो ऐसा करना ही चाहिए।
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