गुस्सा आने पर तुरंत क्या करें? ओशो की ये सीखें बदल सकती हैं आपका नजरिया
ओशो के अनुसार क्रोध को शांत करने के आसान उपाय, मन को स्थिर रखने की तकनीक और गुस्से को समझने का नजरिया हैं, जो बदल सकते हैं आपकी सोच।

ओशो के पाठ: गुस्सा आने पर खुद को कैसे संभालें ? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गुस्सा इंसान की स्वाभाविक भावनाओं में से एक है। कभी किसी की बात बुरी लगने पर, तो कभी उम्मीदें पूरी न होने पर हमें गुस्सा आ जाता है। कई बार गुस्से में हम ऐसी बातें कह देते हैं, जिनका पछतावा बाद में होता है। रिश्तों में तनाव बढ़ता है और मन की शांति भी छिन जाती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि गुस्सा आने पर खुद को कैसे संभालें? ओशो के पाठ इस सवाल पर एक अलग नजरिया पेश करते हैं। उनके विचारों के अनुसार, क्रोध को समझना और उसके प्रति सजग होना, उसे बिना सोचे-समझे व्यक्त करने से अधिक महत्वपूर्ण है। चलिए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
गुस्सा आए तो तुरंत प्रतिक्रिया न दें
गुस्सा आने पर सबसे पहला कदम है कुछ पल रुक जाना। अक्सर हम बिना सोचे जवाब दे देते हैं या सामने वाले को ऐसी बातें कह देते हैं, जो बाद में रिश्तों में दूरी पैदा करती हैं। ऐसे में गहरी सांसें लें। ध्यान दें कि आपके शरीर में क्या बदलाव हो रहे हैं। क्या दिल की धड़कन तेज हो रही है? क्या चेहरे पर गर्माहट महसूस हो रही है? क्या मांसपेशियों में तनाव बढ़ रहा है? इन अनुभवों को महसूस कर रहे हैं, तो भावना और अपनी प्रतिक्रिया के बीच थोड़ा अंतर कर सकते हैं। यही छोटा-सा विराम आपको सोच-समझकर कदम उठाने में मदद करता है।
गुस्से को दबाने के बजाय पहचानें
जब मन में क्रोध उठे, तो उसे पहचानें और समझने की कोशिश करें कि उसके पीछे क्या कारण है। कई बार गुस्से के पीछे दुख, अपमान, डर या अधूरी अपेक्षाएं छिपी होती हैं। यदि आप इन कारणों को समझने लगें, तो अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। गुस्सा महसूस करना गलत नहीं है, लेकिन गुस्से में किसी को अपमानित करना या नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। अपनी भावना को स्वीकार करते हुए उसके अनुरूप ही अपना व्यवहार रखें।
गुस्से की ऊर्जा को सही दिशा दें
जब गुस्सा बहुत ज्यादा हो, तो कुछ समय के लिए उस परिस्थिति से दूरी बनाना सही हो सकता है। थोड़ी देर टहलें, हल्का व्यायाम करें या शांत जगह पर बैठकर सांसों पर ध्यान दें। यदि संभव हो, तो किसी से बातचीत न करें। जब तक आप खुद को थोड़ा शांत महसूस न करने लगें, तब तक कुछ कहने या करने से बच सकते हैं। गुस्से को निकालने के नाम पर किसी व्यक्ति, वस्तु या खुद को चोट पहुंचाना सही तरीका नहीं है।
अत: गुस्सा आना आपके हाथ में हमेशा नहीं होता, लेकिन उसके बाद आप क्या करते हैं, इस पर आपका नियंत्रण जरूर होना चाहिए।
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