भगवान शिव से कैसे जुड़ें? बिना किसी कठिन पूजा-पाठ और रीति-रिवाज के, शिव पुराण में छिपा है जवाब
भगवान शिव से जुड़ने के लिए बाहरी रीति-रिवाजों से अधिक आंतरिक शांति और सच्ची भक्ति महत्वपूर्ण है। मानस पूजा और ...और पढ़ें

बिना किसी कठिन पूजा-पाठ के शिव से जुड़ने का आसान तरीका

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान शिव को ब्रह्मांड का सर्वोच्च देवता ही नहीं, बल्कि निर्माता भी माना जाता है। शास्त्रों में शिव के गुणों को इतना समृद्ध बताया गया है कि, हजार सालों तक भी उनका वर्णन कर पाना आसान नहीं है।
वेद पुराण में उनकी महिमा के बारे में 'नेति नेति', यानी उन्हें जानना असंभव है। भगवान शिव के कई नामों में एक नाम 'आशुतोष' भी है, जिसका मतलब है कि वे बड़ी ही सरलता से खुश हो जाते हैं।
शिव से कैसे जुड़े?
हममें से अधिकतर लोग भगवान शिव की पूजा-अर्चना, उपासना और न जाने क्या-क्या करते हैं, लेकिन उनसे जुड़ाव का एहसास हर किसी को नहीं होता।
लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि, शिव से जुड़ने की शुरुआत मुश्किल रीति-रिवाजों से नहीं होती, बल्कि इसकी शुरुआत मन के अंदर से होती है। शिव पुराण में बार-बार उन गुणों को बताया गया है, जो भक्त को सच्चा बनाते हैं।

भगवान शिव की मानस पूजा करें
भगवान शिव की पूजा बाहरी तौर पर ही नहीं, बल्कि आंतरिक रूप से भी की जा सकती है। जब बाहरी रस्में आसान न लगे, तो सच्चे मन से उन्हें जल, फूल और भक्ति अर्पित करें। मानस पूजा इस बात का प्रतीक है कि, जब बाहरी चीजें चढ़ाना आसान न हो, तब सच्चे मन से उन्हें याद करें।
शिव पुराण में बताया गया है कि, जब मन में किसी भी तरह का द्वेष, अहंकार या ईर्ष्या नहीं होती है, तो अपने आप ही ईश्वर की कृपा के लिए जगह बन जाती है। शांति बेचैन मन को शिव की ओर मोड़ने में मदद करती है।
उदाहरण के लिए, मार्कंडेय ने शिव की पूजा पूरी तरह से समर्पण के साथ की। उनकी भक्ति अहंकार पर नहीं, बल्कि पूरे विश्वास पर आधारित थी।
शांत मन में वास करते हैं भगवान शिव
भगवान शिव की भक्ति और उनसे जुड़ने के लिए आपको एक ही दिन में सब कुछ बदलने की जरूरत नहीं है। अपनी शुरुआत एक शांत प्रार्थना से करें। एक स्वच्छ, पवित्र और आध्यात्मिक विचार मन में लाएं। शिव से जुड़े मंत्रों का जाप करें और रोजाना कुछ पल शांति से बैठें। हर दिन इसे दोहराएं।
उदाहरण के लिए घुश्मा हर दिन बिना रुके रोजाना 101 लिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा करती थीं। उनकी लगातार भक्ति से शिव खुश हुए और उन्हें हमेशा पास रहने का आशीर्वाद दिया।
भगवान शिव को सच्चे मन से याद करने पर जुड़ाव अपने आप महसूस होगा। हर विनम्र और स्थिर कोशिश उनकी ओर एक कदम बन जाती है। यह रास्ता तब और गहरा हो जाता है, जब भक्ति केवल एक घटना न रहकर आपके जीने का तरीका बन जाती है।
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