Holika Dahan 2026: होलिका दहन की परिक्रमा के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियां, पढ़ें नियम और सावधनियां
होलिका दहन की परिक्रमा करते समय कुछ गलतियों से बचना महत्वपूर्ण है। अग्नि की परिक्रमा हमेशा दक्षिणावर्त करें और शांत मन से मंत्रों का जाप करें।

Holika Dahan 2026: कैसी पाएं जीवन में सुख-शांति? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। होलिका दहन के समय अग्नि की परिक्रमा करना केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर की बुराइयों को खत्म करने का एक पवित्र अवसर है। जब आप परिवार के साथ होलिका पूजन के लिए निकलें, तो कुछ बातों का खास ध्यान रखें। अक्सर अनजाने में हुई छोटी-छोटी गलतियां हमारी प्रार्थना के फल को कम कर सकती हैं।
यदि हम सही विधि और आदर के साथ परिक्रमा करते हैं, तो घर की अशांति दूर होती है और जीवन के संचालन में सहजता आती है। आइए जानते हैं कि परिक्रमा के दौरान हमें किन बातों से बचना चाहिए ताकि हमारे घर में खुशहाली बनी रहे।
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(Image Source: AI-Generated)
परिक्रमा की दिशा और गति का रखें ध्यान
परिक्रमा के दौरान सबसे बड़ी गलती दिशा को लेकर होती है। शास्त्रों के अनुसार, अग्नि की परिक्रमा हमेशा घड़ी की दिशा में यानी दाएं हाथ की ओर (Clockwise) से ही शुरू करनी चाहिए। कभी भी उल्टी दिशा में परिक्रमा न करें, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है और इससे मन में नकारात्मक विचारों के आने की आशंका बनी रहती है। साथ ही, परिक्रमा बहुत तेजी से दौड़कर या धक्का-मुक्की करते हुए नहीं करनी चाहिए। शांत मन और मध्यम गति से चलते हुए भगवान का शुक्रिया अदा करें। जब आप संयम के साथ अग्नि के चारों ओर घूमते हैं, तो शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यवसाय में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
परिक्रमा के दौरान बातचीत और व्यवहार
अक्सर देखा जाता है कि लोग परिक्रमा करते समय आपस में हंसी-मजाक या इधर-उधर की बातें करने लगते हैं। यह एक गंभीर गलती है। परिक्रमा का समय ईश्वर से जुड़ने और अपने भीतर झांकने का होता है। इस दौरान मौन रहना या मन ही मन मंत्रों का जाप करना सबसे उत्तम है। यदि आप परिक्रमा के समय दूसरों की बुराई या क्रोध करते हैं, तो इससे पुण्य कम होने की आशंका रहती है। इसके बजाय, मन में अपनी बड़ी इच्छाएं दोहराएं और परिवार की सुख-सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें। शांत रहकर की गई प्रार्थना ही भगवान तक जल्दी पहुंचती है और मानसिक शांति दिलाती है।
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सामग्री अर्पित करने में न करें लापरवाही
अग्नि में सामग्री अर्पित करते समय भी सावधानी बरतनी जरूरी है। परिक्रमा के दौरान अग्नि में जूठा भोजन या प्लास्टिक जैसी अशुद्ध चीजें भूलकर भी न डालें। शास्त्रों में नई फसल के अनाज, गेहूं की बालियां, चना और सूखे नारियल को ही अग्नि में अर्पित करना शुभ माना गया है। इन पवित्र वस्तुओं को चढ़ाने से घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती। यदि आप गलत सामग्री का प्रयोग करते हैं, तो इससे वातावरण दूषित होने की आशंका रहती है। सही सामग्री का उपयोग करके आप अपने पितरों का आशीर्वाद पा सकते हैं, जिससे पिता की संपत्ति और सुख में वृद्धि का मार्ग खुलता है।
पूजन के बाद की जरूरी सावधानी
परिक्रमा पूरी होने के तुरंत बाद पीठ दिखाकर वहां से न हटें। सबसे पहले अग्नि देव को हाथ जोड़कर प्रणाम करें और अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें। परिक्रमा के बाद बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेना न भूलें, क्योंकि बड़ों का सम्मान करने से ही भाग्य चमकता है। पूजन के बाद घर लौटते समय मन में किसी के प्रति कड़वाहट न रखें। इस दिन किया गया ग्रैटिट्यूड मेडिटेशन आपके मन को बहुत सुकून देगा। जब हम इन नियमों का पालन करते हैं, तो हमारे जीवन की नकारात्मकता भस्म हो जाती है और हम सहजता के साथ सफलता की ओर बढ़ते हैं।
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लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।
