विदाई के वक्त मायका छोड़ते हुए चावल क्यों लुटाती है दुल्हन? बहुत गहरा है इस रस्म का मतलब
शादी में बेटी की विदाई के समय पीछे चावल फेंकने की रस्म का क्या महत्व है? जानिए इस परंपरा के पीछे छुपा लक्ष्मी स्वरूप और मायके की बरकत का रहस्य।

चावल फेंकने की परंपरा (AI-Generated image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शादी का घर कितना भी खुशियों से भरा हो, विदाई का वो एक पल सबकी आंखों में आंसू ला ही देता है। ये वो पल होता है जब माता-पिता से दूर जाने का अहसास आंसुओं के जरिए बाहर आता है। विदाई के समय एक खास परंपरा भी निभाई जाती है जब दुल्हन पीछे की ओर चावल फेंकती हुई आगे बढ़ती है।
उस चावल को परिवार के लोग अपने आंचल या झोली में समेटते हैं। यह पल देखने में तो काफी भावुक कर देने वाला होता है लेकिन इसके पीछे एक गहरा रहस्य छिपा होता है। यह चावल के रूप में बेटी का अपने मायके को दिया गया सबसे खूबसूरत प्यार और आशीर्वाद होता है।
लक्ष्मी स्वरूप और मायके की बरकत
इस रस्म के बारे में विस्तार से बताते हुए एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषाचार्य चंद्रेश शर्मा ने इसके महत्व के बारे में बताया है। उनका कहना है कि सनातन परंपरा में चावल यानी 'अक्षत' को पूर्णता, धन-धान्य और माता लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। शास्त्रों में बेटी को भी 'घर की लक्ष्मी' का दर्जा दिया गया है। जब तक बेटी घर में रहती है, खुशहाली और बरकत बनी रहती है।
विदाई के समय पीछे की ओर चावल फेंकने का सीधा सा मतलब यह है कि बेटी भले ही घर से जा रही हो, लेकिन वह अपने घर की सुख-समृद्धि को वहीं छोड़कर जा रही है। वह दुआ करती है कि उसके जाने के बाद भी मायके में कभी अन्न और धन की कमी न हो।
माता-पिता के ऋण और फर्ज से मुक्ति
इस रस्म का एक और गहरा और संवेदनशील पहलू माता-पिता के त्याग से जुड़ा है। जन्म से लेकर शादी तक माता-पिता बेटी की हर खुशी के लिए दिन-रात एक कर देते हैं। चावल फेंककर बेटी एक सांकेतिक संदेश देती है कि माता-पिता ने अपना हर फर्ज बखूबी निभाया है। वे अब हर तरह के सामाजिक और पारिवारिक बोझ से मुक्त हैं। यह रस्म माता-पिता के निस्वार्थ समर्पण के प्रति बेटी का आभार जताने का तरीका है।
विदाई की यह परंपरा केवल आंसुओं और गीतों तक सीमित नहीं है। नया घर बसाने जा रही बेटी का पीछे चावल फेंकना इस बात का सुबूत है कि दूर जाकर भी उसकी दुआएं हमेशा अपने मायके के साथ रहेंगी।
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