हरितालिका तीज 04.09.2016 विशेष...

अच्छे वर के लिए और पति की दीर्घायु के लिए हरितालिका तीज व्रत किया जाता है। यह व्रत अविवाहित कन्याएं और विवाहित महिलाएं दोनों ही करती हैं। भारत में हरितालिका तीज का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस पर्व की उत्तर भारत में काफी धूम रहती है।

हरितालिका तीज दो शब्दों से मिलकर बनी है। हरित और तालिका। यहां हरित का अर्थ है हरण करना और तालिका का अर्थ सखी होता है। यह पर्व भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है, जिस कारण इसे तीज कहते है। इस व्रत को हरितालिका इसलिए कहा जाता है, क्योकि पार्वती की सखी (मित्र) उन्हें पिता के घर से हरण कर जंगल में ले गई थी।

व्रत की पूजन सामग्री

हरितालिका तीज की पूजन सामग्री गीली मिट्टी या बालू रेत। बेलपत्र, शमी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल, अकाव का फूल, मंजरी, जनैऊ, वस्त्र व सभी प्रकार के फल एंव फूल पत्ते आदि। सुहाग सामग्री-मेंहदी, चूड़ी, काजल, बिंद, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, माहौर, बाजार में उपलब्ध सुहाग आदि।

एवं श्रीफल, कलश, अबीर, चन्दन, घी-तेल, कपूर, कुमकुम, दीपक, दही, चीनी, दूध, शहद व गंगाजल पंचामृत के लिए।

ऐसे कीजिए व्रत

हरितालिका तीज के दिन महिलायें निर्जला व्रत रखती है। इस दिन शंकर-पार्वती की बालू या मिट्टी की मूति बनाकर पूजन किया जाता है। घर को स्वच्छ करके तोरण-मंडप आदि सजाया जाता है। प्रत्येक पहर में भगवान शंकर का पूजन व आरती होती है।

इस पर्व को कई जगहों पर बूढ़ी तीज भी कहा जाता है। इस दिन सास अपनी बहुओं को सुहाग का सिंधारा देती हैं। इस व्रत को करने से कुंआरी युवतियों को मनचाहा वर मिलता है और सुहागिन स्त्रियों के सौभाग्य में वृद्धि होती है और शिव-पार्वती उन्हें अखंड सौभाग्यवती रहने का वरदान देते हैं।

Posted By: Preeti jha

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