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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 01, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Ganga Saptami 2025: गंगा सप्तमी पर करें इस चालीसा का पाठ, होंगी अखंड सौभाग्य की प्राप्ति

Published: Thu, 01 May 2025 01:02 PM (IST)

गंगा सप्तमी हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। पंचांग गणना के आधार ...और पढ़ें

Ganga Saptami 2025: तुलसी चालीसा का पाठ।
Ganga Saptami 2025: तुलसी चालीसा का पाठ।

HighLights

  1. गंगा सप्तमी का दिन मां गंगा के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।
  2. गंगा सप्तमी पर मां गंगा की पूजा होती है।
  3. गंगा सप्तमी का पर्व 3 मई को मनाया जाएगा।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गंगा सप्तमी हिंदुओं के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है। यह दिन पूरी तरह से देवी गंगा को समर्पित है। इस दिन को गंगा जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। लोग इस दिन देवी गंगा की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख महीने में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी मनाई जाएगी। इस साल यह 3 मई को मनाई जा रही है। सनातन धर्म में कोई भी शुभ अवसर हो उसमें तुलसी पूजन का बड़ा महत्व है। ऐसे में इस दिन (Ganga Saptami 2025) मां गंगा की पूजा के अलावा मां तुलसी की पूजा भी करें। देवी के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें जल अर्पित करें।

नारियल, चुनरी चढ़ाएं। आटे के हलवे का भोग लगाएं। तुलसी चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती करें। ऐसा करने से सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

।।तुलसी चालीसा का पाठ।। (Tulsi Chalisa Ka Path)

श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।

जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।

नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।

दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।

विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।

भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।

जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।

करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।

कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।

तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।

कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।

वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।

श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।

कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।

छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।

तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।

औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,

देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।

वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।

नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।

नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।

नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।

नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।

नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।

नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।

जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।

निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।

करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।

शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।

क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।

मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।

जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।

बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।

प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।

चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।

करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।

पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।

यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।

करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।

है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।

तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।

भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।

यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।

गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।

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