12 जून दिन बुधवार को गंगावतरण दिवस है, जिसे गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान करने से 10 दोषों का हरण होता है। हरिद्वार और काशी में गंगा-स्नान का विशेष महत्व वर्णित किया गया है। लोक-वाणी में गंगा के महत्व को इन पंक्तियों के माध्यम से उद्घोषित किया गया है-

“गंगा-गंगा जो नर कहै, भूखा-नंगा कभी न रहै।

गंगा जी की धारा है, पाप काटने की आधारा है।।”

गंगा में आज स्नान से जो 10 दोष दूर होते हैं, वे कुछ इस प्रकार हैं—

1. भय

2. लोभ

3. ईर्ष्या

4. द्वेष

5. मद

6. मत्सर

7. संचय

8. परनिंदा

9. मोह

10. क्रोध।

इसके अतिरिक्त कायिक, वाचिक एवं मानसिक पाप का भी क्षय इस दिन गंगा-स्नान से स्वतः हो जाता है। उक्त तीनों भावों में 10 पाप होते हैं। तीन पाप कायिक, चार पाप वाचिक और तीन पाप मानसिक।

ऐसी मान्यता है कि राजा भगीरथ जिन मार्गों से होकर गंगा को पृथ्वी पर लाए, उन मार्गों में जीवन रक्षक औषधियां और वनस्पतियां थीं, जिनके अर्क गंगा के जल में समाहित हो गए। माना जाता है कि गंगा के मार्ग में आज भी वो जीवन रक्षक औषधियां और वनस्पतियां हैं, जो उसके जल के साथ समाहित होकर बहती हैं। इस ज्येष्ठ मास में ये औषधियां अत्यधिक पनपती हैं, इसलिए गंगा दशहरा के समय गंगा जल 10 प्रकार के औषधियों से युक्त होता है।

गंगा जल में 10 औषधियां

1. गिलोय

2. हर्रे

3. बहेड़ा

4. करंज

5. शतावर

6. अलकत्क

7. चन्दन

8. हर्रिद्रा

9. आमलक

10. घृतकुमारी

आज का दान

गंगा दशहरा के दिन शर्करा, जल से भरा हुआ घड़ा और गाय दान से पुण्य लाभ मिलता है।

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रामेश्वरम सेतु का गंगा दशहरा से संबंध

गंगा दशहरा के दिन लंका पर विजय के लिए रामेश्वरम सेतु निर्माण का कार्य भी हुआ था। “दशयोगे सेतुमध्ये लिंगरूपधरम हरम।।” ऐसा प्रमाण प्राप्त होता है।

— ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट

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Posted By: kartikey.tiwari

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