गया। 17 दिनों के पितृपक्ष मेले का 8 दिन समाप्त हो गया है। इन 8 दिनों में शहर का चप्पा-चप्पा अतिथियों से भरा था। अनुमान के मुताबिक लगभग 4 लाख तीर्थयात्री गयाजी को नमन करने के लिए आए हैं। इनके आगमन से पूरा मेला क्षेत्र में धर्ममय माहौल बना हुआ है। सुबह से देर रात तक लोगों का आवागमन बना है।

गयाजी में पिंडदान करने वाले तीर्थयात्रियों में अच्छी संख्या 17 व 15 दिवसीय कर्मकांड करने वाले श्रद्धालुओं की है। ये श्रद्धालु प्रारंभ की तिथि से पहले ही गयाजी में अपना आवास ले चुके हैं। सबसे कम संख्या एक दिवसीय कर्मकांडियों की है जो सुबह आते हैं और देर रात चले जाते हैं। एक दिन के कर्मकांड में फल्गु में तर्पण, विष्णुपद मंदिर में पिंडदान और अक्षयवट में समर्पण के उपरांत इनकी विदाई हो जाती है।

गया आने वाले तीर्थयात्री अधिकांश सड़क मार्ग और रेल मार्ग से आते हैं। वाहनों का पड़ाव केन्दुई, गया कालेज खेल परिसर और सड़क किनारे है। इनका ठहराव ही यात्रियों की संख्या का आभास करा दे रहा है। वैसे संवास सदन समिति प्रत्येक वाहनों से सेवा शुल्क वसूलती है। पर 8 वें दिन तक उसके पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं था कि कितने संख्या में वाहन गयाजी आए हैं। समिति के अधिकारी ने सोमवार की देर शाम दूरभाष पर बताया कि तीर्थयात्रियों और वाहनों के आंकड़े तैयार किए जा रहे हैं।

रेल मार्ग से आने वाले तीर्थयात्री के आंकड़े भी विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। वैसे में एक अनुमान ही लगाया जा रहा है कि यात्रियों की संख्या भीड़ के मुताबिक कितनी है। एक तीर्थ पुरोहित ने बताया कि इन आठ दिनों के बीच 3 से 4 लाख यात्री आ चुके हैं।

चूंकि इनका मानना है कि जो 17 दिवसीय कर्मकांड करने वाले यात्री हैं वे एक स्थान पर एक दिन में कार्य पूरा कर दूसरे दिन दूसरे वेदी पर कर्मकांड करते हैं।

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