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एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026: संतान की उन्नति के लिए इस दिन करें मां गौरी की पूजा, दूर होंगी जीवन की सभी बाधाएं

Published: Mon, 04 May 2026 12:05 PM (GMT+05:30)

एकदंत संकष्टी चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश की पूजा का विधान है।

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HighLights

  1. एकदंत संकष्टी चतुर्थी का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है

  2. इस दिन माता गौरी की पूजा से शुभ फलों की प्राप्ति होती है

  3. इस दिन व्रत और पूजा का विधान है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को 'एकदंत संकष्टी चतुर्थी' के रूप में मनाया जाता है। यह दिन मुख्य रूप से भगवान श्री गणेश की पूजा के लिए समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गणेश जी के साथ-साथ माता गौरी की पूजा करने से संतान के जीवन में आ रही सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

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एकदंत संकष्टी चतुर्थी और गौरी पूजन का महत्व

चतुर्थी तिथि गणेश जी को समर्पित हैं, लेकिन वे शिव-शक्ति के पुत्र हैं। इसलिए, इस दिन माता गौरी का पूजन करना बहुत शुभ माना गया है। विशेष रूप से वे महिलाएं जो संतान की अच्छी सेहत, करियर या अन्य मुश्किलों के लिए इस दिन व्रत रखती हैं। कहते हैं कि माता गौरी की कृपा से संतान से जुड़ी सभी संकट तुरंत दूर होते हैं।

संतान सुख के लिए ऐसे करें पूजा

  • इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
  • पूजा घर में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश और माता गौरी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • माता गौरी को लाल चुनरी, सिंदूर और सुहाग का सामान अर्पित करें।
  • गणेश जी को दूर्वा और मोदक का भोग लगाएं।
  • 'ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः' या 'ॐ पार्वत्यै नमः' मंत्र का 108 बार जप करें।
  • संकष्टी चतुर्थी कथा, गौरी चालीसा का पाठ करें।
  • अंत में आरती करें।
  • संकष्टी चतुर्थी का व्रत रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है।

।।गौरी चालीसा।।

चौपाई

मन मंदिर मेरे आन बसो,

आरम्भ करूं गुणगान,

गौरी माँ मातेश्वरी,

दो चरणों का ध्यान।

पूजन विधि न जानती,

पर श्रद्धा है अपार,

प्रणाम मेरा स्वीकारिये,

हे माँ प्राण आधार।

नमो नमो हे गौरी माता,

आप हो मेरी भाग्य विधाता,

शरणागत न कभी घबराता,

गौरी उमा शंकरी माता।

आपका प्रिय है आदर पाता,

जय हो कार्तिकेय गणेश की माता,

महादेव गणपति संग आओ,

मेरे सकल क्लेश मिटाओ।

सार्थक हो जाए जग में जीना,

सत्कर्मो से कभी हटूं ना,

सकल मनोरथ पूर्ण कीजो,

सुख सुविधा वरदान में दीज्यो।

हे माँ भाग्य रेखा जगा दो,

मन भावन सुयोग मिला दो,

मन को भाए वो वर चाहूं,

ससुराल पक्ष का स्नेहा मैं पायु।

परम आराध्या आप हो मेरी,

फ़िर क्यों वर में इतनी देरी,

हमरे काज सम्पूर्ण कीजियो,

थोडे़ में बरकत भर दीजियो।

अपनी दया बनाए रखना,

भक्ति भाव जगाये रखना,

गौरी माता अनसन रहना,

कभी न खोयूं मन का चैना।

देव मुनि सब शीश नवाते,

सुख सुविधा को वर मैं पाते,

श्रद्धा भाव जो ले कर आया,

बिन मांगे भी सब कुछ पाया।

हर संकट से उसे उबारा,

आगे बढ़ के दिया सहारा,

जब भी माँ आप स्नेह दिखलावे,

निराश मन में आस जगावे।

शिव भी आपका काहा ना टाले,

दया दृष्टि हम पे डाले,

जो जन करता आपका ध्यान,

जग में पाए मान सम्मान।

सच्चे मन जो सुमिरन करती,

उसके सुहाग की रक्षा करती,

दया दृष्टि जब माँ डाले,

भव सागर से पार उतारे।

जपे जो ओम नमः शिवाय,

शिव परिवार का स्नेहा वो पाए,

जिसपे आप दया दिखावे,

दुष्ट आत्मा नहीं सतावे।

सात गुण की हो दाता आप,

हर इक मन की ज्ञाता आप,

काटो हमरे सकल क्लेश,

निरोग रहे परिवार हमेशा।

दुख संताप मिटा देना माँ,

मेघ दया के बरसा देना माँ,

जबही आप मौज में आय,

हठ जय माँ सब विपदाएं।

जिस पे दयाल हो माता आप,

उसका बढ़ता पुण्य प्रताप,

फल-फूल मै दुग्ध चढ़ाऊ,

श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु।

अवगुण दृष्टि दृष्टि दृष्टि मेरे ढक देना माँ,

ममता आंचल कर देना मां,

कठिन नहीं कुछ आपको माता,

जग ठुकराया दया को पाता।

बिन पाऊ न गुन माँ तेरे,

नाम धाम स्वरूप बहू तेरे,

जितने आपके पावन धाम,

सब धामो को मां प्राणम।

आपकी दया का है ना पार,

तभी को पूजे कुल संसार,

निर्मल मन जो शरण में आता,

मुक्ति की वो युक्ति पाता।

संतोष धन्न से दामन भर दो,

असम्भव को माँ सम्भव कर दो,

आपकी दया के भारे,

सुखी बसे मेरा परिवार।

आपकी महिमा अति निराली,

भक्तो के दुःख हरने वाली,

मनोकामना पुरन करती,

मन की दुविधा पल मे हरती।

चालीसा जो भी पढें सुनाया,

सुयोग वर् वरदान में पाए,

आशा पूर्ण कर देना माँ,

सुमंगल साखी वर देना माँ।

गौरी माँ विनती करूँ,

आना आपके द्वार,

ऐसी माँ कृपा किजिये,

हो जाए उद्धार।

हीं हीं हीं शरण में,

दो चरणों का ध्यान,

ऐसी माँ कृपा कीजिये,

पाऊँ मान सम्मान।

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