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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 17, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Diwali 2024: दिवाली पर श्रीयंत्र लाने का बना रहे हैं मन, तो जरूर जान लें ये जरूरी बातें

Published: Thu, 17 Oct 2024 05:30 PM (IST)

हर साल कार्तिक माह की अमावस्या पर दिवाली का पर्व मनाया जाता है। ऐसे में पंचांग के अनुसार इस साल ...और पढ़ें

Sri Yantra Tips on Diwali दिवाली पर श्रीयंत्र स्थापना के नियम।
Sri Yantra Tips on Diwali दिवाली पर श्रीयंत्र स्थापना के नियम।

HighLights

  1. हिंदुओं का सबसे बड़े त्योहारों में से एक है दिवाली।
  2. कार्तिक अमावस्या पर मनाया जाता है यह पर्व।
  3. दिवाली पर श्रीयंत्र स्थापित करना माना जाता है शुभ।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दीपावली (Diwali 2024 Date) हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। दिवाली के खास मौके पर मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए घर में श्रीयंत्र लाना काफी शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जिस घर में श्रीयंत्र स्थापित होता है, वहां मां लक्ष्मी स्वयं विराजमान होती हैं। ऐसे में यदि आप भी अपने घर में श्रीयंत्र लाने का मन बना रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें।

इन बातों का रखें ध्यान

श्रीयंत्र हमेशा तांबे, सोने या फिर चांदी का बना होना चाहिए। साथ ही इन धातुओं के मिश्रण से बना श्रीयंत्र भी काफी फलदाई माना जाता है। वहीं रत्न में आप स्फटिक का श्रीयंत्र अपने घर में ला सकते हैं। ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा आपके समस्त परिवार पर बनी रहती है।

किस समय लाएं श्रीयंत्र

शास्त्रों में श्रीयंत्र स्थापित करने के लिए गुरु पुष्य योग व रवि पुष्य योग को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसी के साथ नवरात्र, दिवाली और अक्षय तृतीया पर भी घर में श्रीयंत्र स्थापित करना बहुत ही शुभ माना जाता है। आप इसे अपने घर की उत्तर या फिर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में स्थापित कर सकते हैं।

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कैसे करें प्राण प्रतिष्ठा

श्रीयंत्र की प्राण प्रतिष्ठा के लिए सर्वप्रथम शुभ-मुहूर्त में पूर्ण शुद्ध होने के बाद मां लक्ष्मी का ध्यान करें। एक साफ बर्तन में थोड़ा-सा कच्चा दूध और गंगाजल मिलकर श्रीयंत्र को स्नान करवाएं। आप पंचामृत से भी श्रीयंत्र का अभिषेक कर सकते हैं। इसके बाद स्वच्छ कपड़े से श्रीयंत्र को साफ करें और एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर इसे स्थापित करें। फिर धूप, दीप, लाल फूल, अक्षत और भोग आदि अर्पित करें। विधि-विधान पूर्वक पूजन करने के बाद श्री सूक्त का पाठ करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।