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हनुमान जी की कृपा के लिए सिर्फ 'बड़े मंगल' का इंतजार न करें, रोजाना करें इन दिव्य स्तुति का पाठ

By Suman SainiEdited By: Suman Saini
Published: Fri, 01 May 2026 08:01 AM (IST)

ज्येष्ठ माह में आने वाले मंगलवार को 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' के नाम से भी जाना जाता है।

बजरंगबली की कृपा पाने के लिए करें श्री हनुमान पंचरत्न स्तोत्र का पाठ (Picture Credit- AI Generated)

बजरंगबली की कृपा पाने के लिए करें श्री हनुमान पंचरत्न स्तोत्र का पाठ (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. श्री हनुमान पंचरत्न स्तोत्र के नियमित पाठ से मिलता है लाभ

  2. संकट, भय और नकारात्मक ऊर्जा से मिलती है मुक्ति

  3. हनुमान जी और श्रीराम की विशेष कृपा प्राप्त होती है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्येष्ठ माह में आने वाले मंगलवार विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार पर ही भगवान राम और हनुमान जी की भेंट हुई थी। अधिकमास होने के कारण इस बार ज्येष्ठ माह में कुल 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं।

बजरंगबली जी की कृपा प्राप्ति के लिए आप केवल मंगलवार ही नहीं, बल्कि रोजाना श्री हनुमान पंचरत्न स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। इसमें भगवान श्री हनुमान की विशेषताओं का वर्णन किया गया है।

श्रीहनुमत पंचरत्नम

वीताखिल-विषयेच्छं जातानन्दाश्र पुलकमत्यच्छम् ।
सीतापति दूताद्यं वातात्मजमद्य भावये हृद्यम् ॥१॥

तरुणारुण मुख-कमलं करुणा-रसपूर-पूरितापाङ्गम् ।
सञ्जीवनमाशासे मञ्जुल-महिमानमञ्जना-भाग्यम् ॥२॥

शम्बरवैरि-शरातिगमम्बुजदल-विपुल-लोचनोदारम् ।
कम्बुगलमनिलदिष्टम् बिम्ब-ज्वलितोष्ठमेकमवलम्बे ॥३॥

दूरीकृत-सीतार्तिः प्रकटीकृत-रामवैभव-स्फूर्तिः ।
दारित-दशमुख-कीर्तिः पुरतो मम भातु हनुमतो मूर्तिः ॥४॥

वानर-निकराध्यक्षं दानवकुल-कुमुद-रविकर-सदृशम् ।
दीन-जनावन-दीक्षं पवन तपः पाकपुञ्जमद्राक्षम् ॥५॥

एतत्-एतत्पवन-सुतस्य स्तोत्रं
यः पठति पञ्चरत्नाख्यम् ।
चिरमिह-निखिलान् भोगान् भुङ्क्त्वा
श्रीराम-भक्ति-भाग्-भवति ॥६॥

इति श्रीमच्छंकर-भगवतः
कृतौ हनुमत्-पञ्चरत्नं संपूर्णम् ॥

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(Picture Credit- AI Generated)

॥ हनुमानाष्टक ॥

बाल समय रवि भक्षी लियो तब,

तीनहुं लोक भयो अंधियारों।

ताहि सों त्रास भयो जग को,

यह संकट काहु सों जात न टारो।

देवन आनि करी बिनती तब,

छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो।

को नहीं जानत है जग में कपि,

संकटमोचन नाम तिहारो ॥ १ ॥

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,

जात महाप्रभु पंथ निहारो।

चौंकि महामुनि साप दियो तब,

चाहिए कौन बिचार बिचारो।

कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,

सो तुम दास के सोक निवारो ॥ २ ॥

 अंगद के संग लेन गए सिय,

खोज कपीस यह बैन उचारो।

जीवत ना बचिहौ हम सो जु,

बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो।

हेरी थके तट सिन्धु सबे तब,

लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥ ३ ॥

रावण त्रास दई सिय को सब,

राक्षसी सों कही सोक निवारो।

ताहि समय हनुमान महाप्रभु,

जाए महा रजनीचर मरो।

चाहत सीय असोक सों आगि सु,

दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ॥ ४ ॥

बान लाग्यो उर लछिमन के तब,

प्राण तजे सूत रावन मारो।

लै गृह बैद्य सुषेन समेत,

तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो।

आनि सजीवन हाथ दिए तब,

लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥ ५ ॥

रावन जुध अजान कियो तब,

नाग कि फाँस सबै सिर डारो।

श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,

मोह भयो यह संकट भारो I

आनि खगेस तबै हनुमान जु,

बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥ ६ ॥

 बंधू समेत जबै अहिरावन,

लै रघुनाथ पताल सिधारो।

देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि,

देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो।

जाये सहाए भयो तब ही,

अहिरावन सैन्य समेत संहारो ॥ ७ ॥

काज किये बड़ देवन के तुम,

बीर महाप्रभु देखि बिचारो।

कौन सो संकट मोर गरीब को,

जो तुमसे नहिं जात है टारो।

बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,

जो कछु संकट होए हमारो ॥ ८ ॥

 ॥ दोहा ॥

लाल देह लाली लसे,

अरु धरि लाल लंगूर।

वज्र देह दानव दलन,

जय जय जय कपि सूर ॥ 

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(Picture Credit: Freepik)

हनुमान जी के मंत्र

1. हनुमान मूल मंत्र - ॐ श्री हनुमते नमः॥

2. हनुमान गायत्री मंत्र - ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥

3. मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् मंत्र -

मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्।
वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥