चंद्र ग्रहण 2026: कितने घंटे का होता है सूतक और कैसे की जाती है इसकी गणना?
3 मार्च 2026 को होली के साथ चंद्र ग्रहण लगेगा। ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है। ...और पढ़ें
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Lunar Eclipse 2026: चंद्र ग्रहण 2026 (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। इस साल 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगने वाला है, जो होली के त्योहार के साथ ही पड़ रहा है। जब भी ग्रहण की बात आती है, तो सबसे पहले मन में 'सूतक काल' को लेकर कई सवाल और आशंकाएं उठने लगती हैं।
सूतक वह समय होता है जब वातावरण में नकारात्मक असर बढ़ जाता है, इसलिए इस दौरान कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है। ग्रहण से पहले सूतक कब शुरू होगा और इसकी गिनती कैसे की जाती है, यह समझना हमारे जीवन के सही संचालन और मानसिक शांति के लिए बहुत आवश्यक है।
सूतक काल की गणना और समय
चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल की गणना करना बहुत सरल है। शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने के ठीक 9 घंटे पहले लग जाता है। वहीं, सूर्य ग्रहण के मामले में यह समय 12 घंटे का होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि चंद्र ग्रहण शाम के समय शुरू हो रहा है, तो आप उससे ठीक 9 घंटे पीछे जाकर सूतक के शुरू होने का सही समय जान सकते हैं।
सूतक काल ग्रहण की समाप्ति के साथ ही खत्म होता है। इस गणना को जानकर हम अपने कार्यों और पूजा-पाठ को सही तरह से कर सकते हैं, ताकि ग्रहण के दौरान किसी भी तरह की नियम की अनदेखी होने की आशंका न रहे।
सूतक के दौरान सावधानी और नियमों का पालन
सूतक काल शुरू होते ही मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं और घर में भी मूर्ति पूजा वर्जित मानी जाती है। इस दौरान भोजन बनाने और खाने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि वातावरण की अशुद्धि का असर खाने-पीने की चीजों पर भी पड़ता है। हालांकि, बीमार व्यक्तियों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए नियमों में सहजता बरती जाती है।
खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते डालना बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि तुलसी में नकारात्मकता को दूर करने की अद्भुत शक्ति होती है। सूतक के समय को भगवान के ध्यान और मानसिक जाप में बिताना चाहिए, जिससे हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहे।

(Image Source: AI-Generated)
चंद्र ग्रहण के समय मन और व्यवहार पर नियंत्रण
क्योंकि चंद्रमा मन का कारक है, इसलिए ग्रहण के दौरान मन में घबराहट या तनाव महसूस होने की आशंका बनी रहती है। सूतक काल से ही हमें अपने विचारों पर नियंत्रण रखना चाहिए और किसी भी तरह के विवाद या कलह से बचना चाहिए। इस समय शांत रहकर भगवान का शुक्रिया अदा करना और धार्मिक पुस्तकों का पाठ करना मन को मजबूती देता है।
गर्भवती महिलाओं को सूतक और ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और नुकीली चीजों के प्रयोग से बचना चाहिए। जब हम इन पारंपरिक नियमों का सम्मान करते हैं, तो ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव हमारे जीवन और स्वास्थ्य पर कम पड़ता है।
लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।
