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बार-बार दर्द सहकर भी गलत रिश्ते में क्यों टिकी रहती हैं महिलाएं? चाणक्य नीति में छिपा है जवाब

Published: Sat, 12 Sep 2026 02:01 PM (IST)

चाणक्य नीति बताती है कि लोग दर्द देने वाले रिश्तों में भी वफादार क्यों रहते हैं, इसका कारण भावनात्मक लगाव और पुरानी यादें हैं।

महिलाएं ऐसे रिश्तों में क्यों रहती हैं जिनसे उन्हें दुख मिलता है? (Picture Credits- AI Images)

महिलाएं ऐसे रिश्तों में क्यों रहती हैं जिनसे उन्हें दुख मिलता है? (Picture Credits- AI Images)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कभी-कभी सबसे ज्यादा दिल टूटना अजनबियों से नहीं होता, यह उन लोगों से होता है जिन पर किसी ने सबसे ज्यादा विश्वास किया होता है। लेकिन इसके बाद भी बार-बार दर्द, अपमान और इमोशनल ब्रेक डाउन के बाद भी कई महिलाएं उन्हीं लोगों के लिए प्रति वफादार बनी रहती हैं जिन्होंने उन्हें काफी चोट पहुंचाई है। बाहरी लोगों को यह बात समझ में नहीं आती है।

कुछ लोग इसे कमजोरी मानते हैं, जबकि कुछ इसे अंधा प्यार कहते हैं। लेकिन आचार्य चाणक्य के मुताबिक, सच्चाई इससे काफी अलग है। चाणक्य नीति के मुताबिक, लगाव मानव निर्णयों को काबू करने वाली सबसे शक्तिशाली शक्तियों में से एक है। जब वफादारी, आशा, स्मृति, त्याग और भावनात्मक निर्भरता एक साथ मिल जाती है, तो इसे छोड़ना काफी मुश्किल हो जाता है।

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जब वफादारी दर्द से ज्यादा ताकतवर हो

चाणक्य का मानना था कि, इंसान अक्सर इसलिए जुड़े रहते हैं क्योंकि वे खुश होते हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि भावनात्मक यादों से पीछा छुड़ाना उनके लिए मुश्किल होता है।

कई महिलाएं दुख मिलने के बाद भी पार्टनर के लिए वफादार बनी रहती हैं क्योंकि उन्हें तकलीफदेह पलों के मुकाबले अच्छे पल ज्यादा याद रहते हैं। वो अपने आप को उम्मीद देते रहते हैं कि जिस इंसान से उन्होंने कभी बहुत प्यार किया था, वह फिर से पहले जैसा हो जाएगा।

नई शुरुआत करने का डर

चाणक्य ने एक छिपी हुई सच्चाई को गहराई से समझाने की कोशिश की है कि, इंसान के कई फैसले डर से लिए जाते हैं। कभी-कभी लोग इसलिए वफादार बने रहते हैं क्योंकि उन्हें भावनात्मक दर्द से ज्यादा अकेलेपन का डर होता है। सालों के जुड़ाव के बाद लाइफ को फिर से शुरू करना, किसी नए पर भरोसा करना या भावनात्मक स्थिरता को फिर से पाना डरावना लगा सकता है।

कई महिलाएं चुपचाप खुद यह समझा लेती हैं कि अकेले अनिश्चितता का सामना करने के बजाय दर्द सहना ज्यादा सही रहेगा। जब दिल थक जाता है और दिमाग कहता है कि, 'क्या पता कल हालात बेहतर हो जाएं।'

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भावनात्मक त्याग से गहरा लगाव क्यों पैदा होता है?

चाणक्य कहते हैं थे कि, लोग उन चीजों की अधिक कद्र करते हैं जिनके लिए वे काफी त्याग करते हैं। रिश्तों में भावनात्मक त्याग से मजबूत लगाव पैदा होता है। कई महिलाएं किसी व्यक्ति के लिए सालों तक देखभाल, सब्र, वफादारी, समझौते और अपनी भावनात्मक ऊर्जा लगा देती हैं।

इतना कुछ देने के बाद भी उस रिश्ते से अलग होना ऐसा लगता है कि वे अपना कोई हिस्सा खो रही हैं। इसके बाद मन उस रिश्ते को बचाने के लिए पूरी कोशिश करने लगता है क्योंकि रिश्ते का नाकाम होना भावनात्मक रूप से काफी तकलीफदेह है। यही कारण है कि कुछ लोग सालों तक बेइज्जती की उपेक्षा सहते रहते हैं।

हालांकि चाणक्य वफादारी का काफी सम्मान करते थे, लेकिन उन्होंने बिना सोचे-समझे भावनात्मक लगाव रखने के प्रति भी सावधान किया था। उनकी सीख के मुताबिक, जो रिश्ते बार- बार शांति, सम्मान और मानसिक मजबूती को नुकसान पहुंचाता है, उन्हें कभी भी आत्म सम्मान की कीमत पर नहीं बचाना चाहिए।

चाणक्य का मानना था कि, भावनाओं को समझदारी से काबू में करना चाहिए, वरना लगाव धीरे-धीरे खुद को बर्बाद करने का कारण बन जाता है। उनकी सीख लोगों को याद दिलाती है कि सच्चा प्यार आत्मा को मजबूत बनाता है, न कि आत्मविश्वास, शांति और भावनात्मक स्थिरता को अंदर ही अंदर लगातार तोड़ता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।