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करियर में मिल रही है असफलता? गुरुवार की शाम करें विष्णु जी के इन नामों का जप, खुलेंगे तरक्की के द्वार

Published: Thu, 16 Apr 2026 12:15 PM (GMT+05:30)

क्या मेहनत के बाद भी करियर में ग्रोथ नहीं मिल रही? गुरुवार की शाम भगवान विष्णु के इन पवित्र नामों का जप करें। यहां जानें महत्व।

भगवान विष्णु के 108 नामों का महत्व। (Picture Credit- AI Generated)

भगवान विष्णु के 108 नामों का महत्व। (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. गुरुवार का दिन का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है

  2. यह गुरु बृहस्पति को समर्पित है

  3. इस दिन पूजा-पाठ का बड़ा महत्व है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, करियर में प्रगति और मान-सम्मान का सीधा संबंध बृहस्पति देव और भगवान विष्णु से है। अगर आपकी तरक्की रुकी हुई है या नौकरी में लगातार परेशानियां आ रही हैं, तो गुरुवार की शाम का एक छोटा सा उपाय आपकी किस्मत को बदल सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के 108 नामों का जप बहुत शुभ माना गया है। ऐसे में इस दिन इन पवित्र नामों का जप जरूर करें, जिसकी विधि यहां दी हुई है।

गुरुवार की शाम का महत्व

गुरुवार का दिन देवताओं के गुरु बृहस्पति को समर्पित है। शाम का समय यानी प्रदोष काल भक्ति और संकल्प के लिए बहुत फलदायी माना जाता है। इस समय किया गया मंत्र जप भाग्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

जप विधि

  • गुरुवार को पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • शाम को स्नान के बाद या हाथ-पैर धोकर पीले वस्त्र पहनें।
  • श्री हरि विष्णु की प्रतिमा के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • दीपक में एक चुटकी हल्दी डालना शुभ होता है।
  • जप के लिए कुश आसन का प्रयोग करें।
  • मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
  • अगर हो पाए, तो जप के लिए तुलसी की माला का प्रयोग करें।
  • आरती से पूजा पूर्ण करें।
  • पूजा में हुई गलती के लिए माफी मांगे।

करियर के लिए खास उपाय

नाम जप के साथ-साथ आप "ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: बृहस्पतये नमः" मंत्र का जप करते हैं, तो आपकी कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है। इससे नौकरी में प्रमोशन के योग बनते हैं और कार्यस्थल पर सीनियर्स के साथ रिश्ते अच्छे होते हैं।

।।भगवान विष्णु के 108 नाम।।

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1) ऊँ श्री विष्णवे नम:

2) ऊँ श्री परमात्मने नम:

3) ऊँ श्री विराट पुरुषाय नम:

4) ऊँ श्री क्षेत्र क्षेत्राज्ञाय नम:

5) ऊँ श्री केशवाय नम:

6) ऊँ श्री पुरुषोत्तमाय नम:

7) ऊँ श्री ईश्वराय नम:

8) ऊँ श्री हृषीकेशाय नम:

9) ऊँ श्री पद्मनाभाय नम:

10) ऊँ श्री विश्वकर्मणे नम:

11) ऊँ श्री कृष्णाय नम:

12) ऊँ श्री प्रजापतये नम:

13) ऊँ श्री हिरण्यगर्भाय नम:

14) ऊँ श्री सुरेशाय नम:

15) ऊँ श्री सर्वदर्शनाय नम:

16) ऊँ श्री सर्वेश्वराय नम:

17) ऊँ श्री अच्युताय नम:

18) ऊँ श्री वासुदेवाय नम:

19) ऊँ श्री पुण्डरीक्षाय नम:

20) ऊँ श्री नर-नारायणा नम:

21) ऊँ श्री जनार्दनाय नम:

22) ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नम:

23) ऊँ श्री चतुर्भुजाय नम:

24) ऊँ श्री धर्माध्यक्षाय नम:

25) ऊँ श्री उपेन्द्राय नम:

26) ऊँ श्री माधवाय नम:

27) ऊँ श्री महाबलाय नम:

28) ऊँ श्री गोविन्दाय नम:

29) ऊँ श्री प्रजापतये नम:

30) ऊँ श्री विश्वातमने नम:

31) ऊँ श्री सहस्त्राक्षाय नम:

32) ऊँ श्री नारायणाय नम:

33) ऊँ श्री सिद्ध संकल्पयाय नम:

34) ऊँ श्री महेन्द्राय नम:

35) ऊँ श्री वामनाय नम:

36) ऊँ श्री अनन्तजिते नम:

37) ऊँ श्री महीधराय नम:

38) ऊँ श्री गरुडध्वजाय नम:

39) ऊँ श्री लक्ष्मीपतये नम:

40) ऊँ श्री दामोदराय नम:

41) ऊँ श्री कमलापतये नम:

42) ऊँ श्री परमेश्वराय नम:

43) ऊँ श्री धनेश्वराय नम:

44) ऊँ श्री मुकुन्दाय नम:

45) ऊँ श्री आनन्दाय नम:

46) ऊँ श्री सत्यधर्माय नम:

47) ऊँ श्री उपेन्द्राय नम:

48) ऊँ श्री चक्रगदाधराय नम:

49) ऊँ श्री भगवते नम

50) ऊँ श्री शान्तिदाय नम:

51) ऊँ श्री गोपतये नम:

52) ऊँ श्री श्रीपतये नम:

53) ऊँ श्री श्रीहरये नम:

54) ऊँ श्री श्रीरघुनाथाय नम:

55) ऊँ श्री कपिलेश्वराय नम:

56) ऊँ श्री वाराहय नम:

57) ऊँ श्री नरसिंहाय नम:

58) ऊँ श्री रामाय नम:

59) ऊँ श्री हयग्रीवाय नम:

60) ऊँ श्री शोकनाशनाय नम:

61) ऊँ श्री विशुद्धात्मने नम :

62) ऊँ श्री केश्वाय नम:

63) ऊँ श्री धनंजाय नम:

64) ऊँ श्री ब्राह्मणप्रियाय नम:

65) ऊँ श्री श्री यदुश्रेष्ठाय नम:

66) ऊँ श्री लोकनाथाय नम:

67) ऊँ श्री भक्तवत्सलाय नम:

68) ऊँ श्री चतुर्मूर्तये नम:

69) ऊँ श्री एकपदे नम:

70) ऊँ श्री सुलोचनाय नम:

71) ऊँ श्री सर्वतोमुखाय नम:

72) ऊँ श्री सप्तवाहनाय नम:

73) ऊँ श्री वंशवर्धनाय नम:

74) ऊँ श्री योगिनेय नम:

75) ऊँ श्री धनुर्धराय नम:

76) ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नम:

77) ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नम

78) ऊँ श्री अक्रूराय नम:

79) ऊँ श्री दु:स्वपननाशनाय नम:

80) ऊँ श्री भूभवे नम:

81) ऊँ श्री प्राणदाय नम:

82) ऊँ श्री देवकी नन्दनाय नम:

83) ऊँ श्री शंख भृते नम:

84) ऊँ श्री सुरेशाय नम:

85) ऊँ श्री कमलनयनाय नम:

86) ऊँ श्री जगतगुरूवे नम:

87) ऊँ श्री सनातन नम:

88) ऊँ श्री सच्चिदानन्दाय नम:

89) ऊँ श्री द्वारकानाथाय नम:

90) ऊँ श्री दानवेन्द्र विनाशकाय नम:

91) ऊँ श्री दयानिधि नम:

92) ऊँ श्री एकातम्ने नम:

93) ऊँ श्री शत्रुजिते नम:

94) ऊँ श्री घनश्यामाय नम:

95) ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नम:

96) ऊँ श्री जरा-मरण-वर्जिताय नम:

97) ऊँ श्री सर्वयज्ञफलप्रदाय नम:

98) ऊँ श्री विराटपुरुषाय नम:

99) ऊँ श्री यशोदानन्दनयाय नम:

100) ऊँ श्री परमधार्मिकाय नम:

101) ऊँ श्री गरुडध्वजाय नम:

102) ऊँ श्री प्रभवे नम:

103) ऊँ श्री लक्ष्मीकान्ताजाय नम:

104) ऊँ श्री गगनसदृश्यमाय नम:

105) ऊँ श्री वामनाय नम:

106) ऊँ श्री हंसाय नम:

107) ऊँ श्री वयासाय नम:

108) ऊँ श्री प्रकटाय नमः

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।