विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

10 या 11 सितंबर? पिठोरी अमावस्या पर स्नान-दान के लिए कौन-सा दिन उत्तम, यहां करें चेक

Published: Tue, 08 Sep 2026 10:39 AM (IST)

2026 में भाद्रपद अमावस्या कब है? जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा की सरल विधि और पितरों से जुड़ा इसका खास महत्व।

भाद्रपद अमावस्या की सही तारीख (AI-Generated Image)

भाद्रपद अमावस्या की सही तारीख (AI-Generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। साल 2026 में भाद्रपद अमावस्या की तारीख को लेकर लोगों के मन में थोड़ी उलझन है कि यह 10 सितंबर को है या 11 सितंबर को? दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही दिन अमावस्या तिथि पड़ रही है। लेकिन, अलग-अलग पूजा के नियमों के कारण इसके अनुष्ठान दो दिनों में बंटे हुए हैं। इस आर्टिकल के जरिए हम पढ़ेंगे कि अमावस्या तिथि कब है और हम किस दिन पूजा व्रत कर सकते हैं।

अमावस्या तिथि का समय

पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 10 सितंबर 2026 को शुरू होगी और इसका समापन 11 सितंबर को होगा।

पिठोरी व्रत 10 सितंबर को क्यों?

पुरानी मान्यताओं के अनुसार, जब अमावस्या तिथि शाम के समय (प्रदोष काल) में होती है, तो वह दिन व्रत और पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। 2026 में यह स्थिति 10 सितंबर, गुरुवार को बन रही है। इसलिए, पिठोरी अमावस्या का व्रत (Pithori Amavasya 2026) और शाम की पूजा 10 सितंबर को ही की जाएगी।

11 सितंबर को क्या है?

हिंदू धर्म में उदया तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) का बहुत महत्व है। चूंकि 11 सितंबर, शुक्रवार को सूर्योदय के समय अमावस्या मौजूद रहेगी, इसलिए सुबह स्नान-दान और पितरों के निमित्त भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर को मानी जाएगी।

क्या है पिठोरी व्रत और इसकी पूजा विधि?

यह व्रत खास तौर पर माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए रखती हैं। 'पिठोरी' का अर्थ है आटे (पीठ) से बनी आकृतियां। इस दिन आटे से 64 योगिनियों और सप्तमातृकाओं की मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा की जाती है।

पूजा के सरल नियम

  • सुबह जल्दी नहाकर व्रत का संकल्प लें।
  • दिन भर व्रत रखें और मुख्य पूजा शाम को प्रदोष काल में करें।
  • पूजा में हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल और धूप-दीप का इस्तेमाल जरूर करें।
  • प्रसाद के रूप में खीर, पूरी, गुड़ और आटे से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित करें।
  • अंत में पिठोरी व्रत की कथा जरूर सुनें।

पितरों का आशीर्वाद

भाद्रपद अमावस्या पितरों (पूर्वजों) के अनुष्ठानों के लिए भी बेहद खास है। 11 सितंबर को लोग श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करके अपने पूर्वजों को याद करेंगे।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।