दुश्मनों पर पानी है जीत? तो बगलामुखी जयंती पर इस विधि से करें पूजा, जानें तिथि और महत्व
मां बगलामुखी, जिन्हें 'पीतांबरा' भी कहा जाता है। देवी शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली देवी के रूप में पूजी जाती हैं।

Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी जयंती शुभ मुहूर्त और पूजा विधि। (Ai Generated Image)
HighLights
हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं की पूजा का विशेष महत्व है
मां बगलामुखी आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं
इसी दिन माता का प्राकट्य हुआ था
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं का विशेष महत्व है, जिनमें मां बगलामुखी आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं। मां बगलामुखी को 'पीतांबरा' भी कहा जाता है और उन्हें शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाली शक्ति के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन माता का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इसे उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। आइए इस पावन तिथि से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं।

बगलामुखी जयंती तिथि (Baglamukhi Jayanti 2026 Date And Time)
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल अष्टमी तिथि 23 अप्रैल 2026 को रात 8 बजकर 49 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 24 अप्रैल को शाम 7 बजकर 21 मिनट पर होगा। ऐसे में बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल को मनाई जाएगी। पूजा का सबसे शुभ समय रात्रि काल माना जाता है, क्योंकि महाविद्याओं की साधना अक्सर रात के समय अधिक प्रभावशाली होती है।
पूजा विधि (Baglamukhi Jayanti 2026 Puja Vidhi)
- पूजा के दौरान पीले वस्त्र धारण करें।
- माता को पीले फूल, पीला चंदन व हल्दी अर्पित करें।
- मां को पीले रंग की चीजें या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
- हल्दी की माला से मां बगलामुखी के मंत्रों का जप करना बेहद लाभकारी माना जाता है।
- ऐसे में इस मंत्र "ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ओम् स्वाहा" का जाप करें। इससे शत्रु शांत होंगे।
- पूजा के समय शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
- अंत में आरती करें।
मां बगलामुखी का महत्व (Baglamukhi Jayanti 2026 Significance)
मां बगलामुखी को गुप्त साधना यानी (तंत्र-मंत्र) की देवी कहा जाता है। इसका मतलब है किसी भी बुरी शक्ति या शत्रु से रक्षा करना। इनका स्वरूप सोने के समान चमकता हुआ है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, ब्रह्मांड की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने देवी की तपस्या की थी। जिससे प्रसन्न होकर माता प्रकट हुई थीं। माना जाता है कि देवी की पूजा से गुप्त शत्रुओं से रक्षा होती है।
सावधानी
बगलामुखी माता की पूजा करते समय मन की पवित्रता और एकाग्रता बहुत जरूरी है। किसी का बुरा करने की नीयत से कभी भी यह पूजा नहीं करनी चाहिए। सिर्फ बाधाओं को दूर करने के लिए ही देवी की पूजा करनी चाहिए।
यह भी पढ़ें- दतिया के पीतांबरा पीठ में राजसत्ता की देवी मां बगलामुखी करती हैं वास; नवरात्र में जरूर करें दर्शन
यह भी पढ़ें- मेष संक्रांति पर सूर्य देव का महापरिवर्तन, सोई किस्मत जगाने के लिए इस तरह दें अर्घ्य
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
