अष्ट वसु, 11 रुद्र और 12 आदित्य: जानें देवताओं के इन दिव्य स्वरूपों की दिव्य जननी कौन हैं?
आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि 8 वसु, 11 रुद्र और 12 आदित्य की दिव्य उत्पत्ति कैसे हुई?

Who is Mata Aditi: देवमाता अदिति की कथा।

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पौराणिक कथाओं में 33 कोटि देवताओं का वर्णन मिलता है। जब भी हम इन देवताओं की बात करते हैं, तो उनमें 8 वसु, 11 रुद्र और 12 आदित्य का नाम सबसे ऊपर आता है।
ये दिव्य शक्तियां सृष्टि के संचालन का प्रतीक हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्रह्मांड को चलाने वाले इन 31 दिव्य स्वरूपों की माता कौन हैं? अगर नहीं तो आइए इस आर्टिकल में इन देवताओं की माता के बारे में जानते हैं। इस कथा का वर्णन विष्णु पुराण के प्रथम अंश अध्याय 15 में मिलता है।
माता अदिति कौन हैं?
विष्णु पुराण के अनुसार, माता अदिति राजा दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं। उनका विवाह ब्रह्मा जी के मानस पुत्र महर्षि कश्यप से हुआ था। देवताओं की माता अदिति की संतानों को आदित्य कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, उनके 12 प्रमुख पुत्र हैं, जिन्हें द्वादश आदित्य कहा जाता है, जो साल के 12 महीनों के सूर्य के रूपों को दिखाते हैं। इनमें देवराज इंद्र, सूर्य देव, वरुण, मित्र, भग और साक्षात भगवान विष्णु शामिल हैं।

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12 आदित्य ऊर्जा और प्रकाश के प्रतीक
माता अदिति और ऋषि कश्यप की संतान होने की वजह से इन्हें आदित्य कहा जाता है। ये सूर्य देव के 12 भिन्न स्वरूप हैं, जो साल के 12 महीनों को दिखाते हैं -
- नाम - विवस्वान, अर्यमा, पूषा, त्वष्टा, सविता, भग, धाता, विधाता, वरुण, मित्र, इंद्र और वामन।
ये सभी जगत को प्रकाश, आरोग्य और जीवन ऊर्जा प्रदान करते हैं।
11 रुद्र संहार और कल्याण की शक्ति
रुद्र भगवान शिव के स्वरूप माने जाते हैं। माना जाता है कि ये अदिति के क्रोध/तप से जन्मे हैं।
- महत्व - कपाली, पिंगल, भीम, विरूपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, अहिर्बुध्न्य, शंभू, चण्ड और भव।
ये सृष्टि में अनुशासन, न्याय और प्रलय काल में संहार का दायित्व संभालते हैं।
8 वसु प्रकृति के आधार तत्व
वसु का मतलब होता है वास करने वाला। ये प्रकृति के पंचतत्वों और ऊर्जाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनकी माता दक्ष प्रजापति की पुत्री वसू मानी जाती हैं।
- नाम - पृथ्वी, अंतरिक्ष, चंद्रमा, जल, अग्नि, वायु, सूर्योदय और प्रकाश।
महाभारत के प्रसिद्ध पात्र भीष्म पितामह पिछले जन्म में प्रभास नाम के वसु ही थे।
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