आज का पंचांग 3 अक्टूबर 2026: जितिया व्रत के दिन राहुकाल से लेकर अभिजीत मुहूर्त तक, नोट करें शुभ-अशुभ समय
आज 3 अक्टूबर 2026 को जितिया व्रत और महालक्ष्मी व्रत का समापन है। आज कृष्ण सप्तमी के बाद अष्टमी तिथि ...और पढ़ें
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3 अक्टूबर 2026 पंचांग: शनिवार को बन रहे हैं ये शुभ योग । (Picture Credit- AI Generated)
आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। आज 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को जितिया व्रत मनाया जा रहा है। आज के दिन का पंचांग बहुत खास है क्योंकि आज ही महालक्ष्मी व्रत का समापन भी हो रहा है।पंचांग के अनुसार आज कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है, जिसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। आज चंद्रमा मिथुन राशि में और सूर्य कन्या राशि में विराजमान हैं। नक्षत्र की बात करें तो आज आर्द्रा नक्षत्र है, जिसके स्वामी राहु और देवता भगवान शिव के रूप रुद्र हैं।आज के दिन शुभ और अशुभ दोनों तरह के समय बन रहे हैं, इसलिए कोई भी नया काम शुरू करने से पहले पंचांग में दिया गया शुभ मुहूर्त जरूर देख लें।
तिथि: कृष्ण सप्तमी
मास: आश्विन
दिन: शनिवार
संवत्: 2083
महत्वपूर्ण विवरण
तिथि: कृष्ण पक्ष की सप्तमी – प्रातः 7 बजकर 59 मिनट तक, फिर अष्टमी तिथि (अगले दिन तड़के 5 बजकर 51 मिनट, 04 अक्टूबर तक)
योग: वरीयान – दोपहर 3 बजकर 21 मिनट तक, फिर परिघ
करण: बव – प्रातः 7 बजकर 59 मिनट तक
करण: बालव – सायं 6 बजकर 54 मिनट तक, फिर कौलव
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय का समय: प्रातः 6 बजकर 15 मिनट
सूर्यास्त का समय: सायं 6 बजकर 5 मिनट
चंद्रोदय का समय: रात्रि 11 बजकर 32 मिनट
चंद्रास्त का समय: अगले दिन दोपहर 1 बजकर 4 मिनट (04 अक्टूबर)
सूर्य और चंद्रमा की राशियां
सूर्य देव: कन्या राशि में स्थित हैं
चन्द्र देव: मिथुन राशि में स्थित हैं
आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक
अमृत काल: सायं 4 बजकर 5 मिनट से सायं 5 बजकर 35 मिनट तक
आज के अशुभ समय
राहुकाल: प्रातः 9 बजकर 12 मिनट से प्रातः 10 बजकर 41 मिनट तक
गुलिकाल: प्रातः 6 बजकर 15 मिनट से प्रातः 7 बजकर 44 मिनट तक
यमगण्ड: दोपहर 1 बजकर 39 मिनट से दोपहर 3 बजकर 7 मिनट तक
आज का नक्षत्र
आज चंद्रदेव आर्द्रा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
आर्द्रा नक्षत्र: अगले दिन मध्यरात्रि बाद 1 बजकर 29 मिनट (04 अक्टूबर) तक, फिर पुनर्वसु
नक्षत्र स्वामी: राहु
राशि स्वामी: बुधदेव
देवता: रुद्र (भगवान शिव का संहारक रूप)
प्रतीक: आंसू की बूंद
सामान्य विशेषताएं: सौम्य स्वभाव, आकर्षक व्यक्तित्व, बुद्धिमान, कूटनीतिज्ञ, बातूनी, कामुक, मेहनती, सरल जीवन पसंद करने वाले और कभी-कभी आत्मविश्वास की कमी।
महालक्ष्मी व्रत 2026
महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ: 19 सितंबर, शनिवार
महालक्ष्मी व्रत समाप्त: 03 अक्टूबर, शनिवार
कुल व्रत दिवस: 15 दिन
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 18 सितंबर, दोपहर 1 बजकर 1 मिनट
अष्टमी तिथि समाप्त: 19 सितंबर, दोपहर 3 बजकर 26 मिनट
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत होती है। देखा जाए तो यह तिथि गणेश चतुर्थी के चार दिन बाद आती है। परंपरा के अनुसार यह व्रत लगातार सोलह दिनों तक रखा जाता है, जिसका समापन अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर होता है।
तिथि के घटने या बढ़ने के कारण कुल व्रतों की संख्या 15 से 17 दिन तक हो सकती है। धन, समृद्धि और वैभव की देवी मां महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए यह उपवास किया जाता है। यह पावन पर्व जीवन में सुख-समृद्धि लाने का एक सुंदर संकेत देता है।
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