आज का पंचांग 18 सितंबर: दुर्वाष्टमी पर बन रहे कई शुभ संयोग, राहुकाल में न करें पूजा; यहां देखें शुभ मुहूर्त
18 सितंबर 2026 यानी शुक्रवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। इस दिन भाद्रपद शुक्ल ...और पढ़ें

आज का पंचांग 18 सितंबर 2026: यहां देखें राहुकाल का समय
आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। 18 सितंबर 2026 यानी आज शुक्रवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद पावन और फलदायी रहने वाला है। इस दिन भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि के विशेष संयोग के साथ दुर्वाष्टमी का पावन व्रत रखा जाएगा। भगवान श्री गणेश की कृपा, संतान सुख और आरोग्य की प्राप्ति के लिए दुर्वाष्टमी का व्रत (Durvashtami Vrat 2026) बेहद उत्तम माना जाता है।
ऐसे में अगर आप इस दिन कोई भी शुभ काम या पूजा-अर्चना करने जा रहे हैं, तो राहुकाल के समय का विशेष ध्यान रखें और अभिजीत मुहूर्त, ज्येष्ठा नक्षत्र तथा आज के संपूर्ण पंचांग की सटीक स्थिति देखकर ही अपने दिन की शुरुआत करें। आइए जानते हैं एस्ट्रोपत्री आनंद सागर पाठक से आज के पंचांग में तिथि, योग, करण, नक्षत्र, ग्रहों की स्थिति और शुभ-अशुभ समय से जुड़ी खास जानकारी।
तिथि: शुक्ल सप्तमी
मास: भाद्रपद
दिन: शुक्रवार
संवत्: 2083
तिथि: शुक्ल पक्ष की सप्तमी – दोपहर 01:00 बजे तक, फिर अष्टमी तिथि
योग: प्रीति – दोपहर 01:35 बजे तक, फिर आयुष्मान्
करण: वणिज – दोपहर 01:00 बजे तक
करण: विष्टि (भद्रा) – अगले दिन तड़के 02:13 बजे (19 सितंबर) तक, फिर बव
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय का समय: प्रातः 06:07 बजे
सूर्यास्त का समय: सायं 06:23 बजे
चंद्रोदय का समय: दोपहर 12:56 बजे
चंद्रास्त का समय: रात्रि 10:52 बजे
सूर्य और चंद्रमा की राशियां
सूर्य देव: कन्या राशि में स्थित हैं
चन्द्र देव: वृश्चिक राशि में (रात्रि 10:44 बजे तक), फिर धनु राशि में प्रवेश
आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक
अमृत काल: दोपहर 12:54 बजे से दोपहर 02:41 बजे तक
आज के अशुभ समय
राहुकाल: प्रातः 10:43 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक
गुलिकाल: प्रातः 07:39 बजे से प्रातः 09:11 बजे तक
यमगण्ड: दोपहर 03:19 बजे से सायं 04:51 बजे तक
आज का नक्षत्र
आज चंद्रदेव ज्येष्ठा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
ज्येष्ठा नक्षत्र: रात्रि 10:44 बजे तक, फिर मूल
स्थान: 16°40’ वृश्चिक राशि से 30°00’ वृश्चिक राशि तक
नक्षत्र स्वामी: बुधदेव
राशि स्वामी: मंगलदेव
देवता: इंद्र (देवताओं के राजा)
प्रतीक: कुंडल, छाता या ताबीज
सामान्य विशेषताएं: बुद्धिमान, चतुर योजनाकार, साहसी, तार्किक, स्वाभिमानी, थोड़े गुस्सैल, कम मित्र वाले और लक्ष्य के प्रति कठोर।
दुर्वाष्टमी व्रत 2026
पूर्वा विद्धा समय: दोपहर 01:00 से शाम 06:23 बजे तक
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 18 सितंबर, दोपहर 01:00 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 19 सितंबर, दोपहर 03:26 बजे
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्वाष्टमी का व्रत रखा जाता है। मुख्य रूप से यह व्रत महिलाओं द्वारा रखा जाता है। देखा जाए तो गणपति बाप्पा का आशीर्वाद पाने और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए यह एक अत्यंत सरल और शुभ उपवास है।
पूरी श्रद्धा, नियम और सच्चे मन से यह व्रत रखने से घर में सुख-शांति का वास होता है। इसके साथ ही जातक को संतान सुख मिलता है और परेशानियों से मुक्ति मिलती है। मान्यताओं के अनुसार दूर्वा घास में शीतलता, पवित्रता और आरोग्य प्रदान करने वाली ऊर्जा निहित होती है।
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