दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। 5 जुलाई को उपच्छाया चंद्रग्रहण पड़ने वाला है। यह उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका महादेश समेत कई जगहों पर दिखाई देने वाला है। हालांकि, एशिया और भारत में उपच्छाया चंद्रग्रहण नहीं दिखाई देगा। धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जब पृथ्वी और चंदमा के बीच सूर्य आ जाता है तो चंद्रमा की रौशनी पृथ्वी पर नहीं आती है। इस घटना को चंद्रग्रहण कहा जाता है। इसे नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। आइए, उपच्छाया चंद्रग्रहण के बारे में विस्तार से जानते हैं-

चंद्रग्रहण कितने प्रकार के होते हैं

धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण तीन तरह के होते हैं, जिनमें पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण, दूसरा आंशिक चंद्रग्रहण और अंतिम उपच्छाया चंद्र ग्रहण है। पूर्ण चंद्रग्रहण में चंद्रमा के आकर में परिवर्तन होता है। जबकि आंशिक चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का कुछ भाग नहीं दिखता है। उपच्छाया चंद्रग्रहण पड़ने पर आकार में कोई बदलाव नहीं होता है।

उपच्छाया चंद्रग्रहण

धार्मिक मान्यता है कि जब पृथ्वी और चंदमा के बीच सूर्य होता है और चंद्रमा पृथ्वी के बाह्य छोर से होकर गुजरता है। इस घटना को उपच्छाया चंद्रग्रहण कहते हैं। इसका अर्थ यह है कि ग्रहण पूरे विश्व में नहीं दिखाई देगा। इस दौरान चांद के आकार में कोई बदलाव नहीं होगा, बल्कि वह अपने पूर्ण रूप में रहेगा। हालांकि, उसकी रौशनी मटमैली जरूर हो जाएगी। यह उन क्षेत्रों में दिखाई देगा, जो पृथ्वी के बाह्य केंद्र में स्थित है।

उपच्छाया चंद्रग्रहण का समय

यह भारतीय मानक समय के अनुसार, सुबह में 8 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 11 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगा। जबकि ग्रहण का अधिकतम प्रभाव सुबह में 9 बजकर 59 मिनट पर होगा।

सूतक समय

चूंकि यह उपच्छाया चंद्रग्रहण है। अतः सूतक नहीं लगेगा। धार्मिक मान्यता है कि जब ग्रहण दिखाई नहीं देता है तो सूतक नहीं लगता है। इसके लिए कोई नियम लागू नहीं होता है। हालांकि, ग्रहण के बाद घर की साफ-सफाई और स्नान ध्यान जरूर करें। खासकर गर्भवती महिलाओं को इस ग्रहण के समय भी अपना विशेष ख्याल रखना चाहिए।

Posted By: Umanath Singh

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