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केश काटने से लेकर हलाल मांस तक: सिख धर्म के 4 बड़े महापाप कौन-से हैं?

Published: Thu, 06 Aug 2026 09:00 AM (IST)

सिख धर्म में चार प्रमुख महापापों को 'बज्र कुरुहत' कहा गया है, जिनका पालन अमृतधारी सिखों के लिए अनिवार्य है।

सिख धर्म में 4 सबसे बड़े पाप कौन-से बताए गए हैं?

सिख धर्म में 4 सबसे बड़े पाप कौन-से बताए गए हैं?

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सिख धर्म दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा धर्म जिसकी स्थापना 15वीं शताब्दी में गुरु नानक और उनके बाद के नौ सिख गुरुओं की शिक्षाओं पर हुई थी। सिख धर्म सेवा पर विश्वास करता है।

सिख धर्म में 4 सबसे बड़े निषेध कामों या महापापों का जिक्र किया गया है। जिसे 'बज्र कुरुहत' कहा जाता है। अमृतधारी सिखों के लिए इन चार नियमों का पालन करना बेहद जरूरी बताया गया है।

सिख धर्म में सबसे बड़ा पाप क्या है?

सिख धर्म से जुड़े प्रत्येक गुरु ने धर्म के रास्ते को अपनाते हुए हमेशा मानवता की सेवा को ही प्राथमिकता दी। उन्होंने सिखों के लिए संगत सेवा को ही परम धर्म बताया। वहीं 11वें गुरु श्री गुरु ग्रंथ साहिब में सिखों के आदर्श जीवन के लिए हर एक सवाल का जवाब मौजूद है। इसमें यह भी बताया गया है कि, एक सिख को क्या नहीं करना चाहिए? सिख धर्म में घोर पापों को बज्र कुरुहत कहते हैं, जिसमें विशेषकर मुख्य रूप से 4 पापों को शामिल किया गया है।

दाढ़ी और सिर के केशों को काटना

सिख धर्म के अनुसार एक सिख को हमेशा अपने केशों की रक्षा करने के साथ अपने दाढ़ी को सेव करने से बचना चाहिए। वे न तो सिर के बाल काट सकता है और न ही दाढ़ी सेव करा सकता है। दशम गुरु श्री गोबिंद सिंह जी के पंच ककारों में केश को भी महत्वपूर्ण ककार में शामिल किया जाता है।

जीवनसाथी को धोखा देना

सिख धर्म में साफ-साफ कहा गया है कि, आप अपने पार्टनर से चाहे कितने समय के लिए कितने ही दूर क्यों न रहे लेकिन उनके साथ ईमानदार रहना बेहद जरूरी है। अगर कोई अपने जीवन साथी को धोखा या बेवफाई करता है, तो वह पाप का भागीदारी बनता है। सिख धर्म के अनुसार, जीवनसाथी के अलावा अन्य स्त्रियां मां और बहन के समान है। श्री गुरु ग्रंथ में इसे पाप की श्रेणी में गिना जाता है।

तंबाकू का सेवन करना

सिख धर्म के पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब के मुताबिक, सिख धर्म को मानने वाले व्यक्ति को तंबाकू या किसी भी तरह की नशीले पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए। दसवें गुरु ने सन् 1699 में खालसा के स्थापना के समय ही तंबाकू को अशुद्ध और गैर कानूनी करार कर दिया था। विशेषकर अमृतधारी खालसा को इसका भूलकर भी सेवन नहीं करना चाहिए। इसे मति भ्रष्ट होने के साथ गुरु के सानिध्य से दूर ले जाने वाली वस्तुओं में गिना जाता है।

हलाल मांस का सेवन करना

सिख धर्म में प्रत्येक सिख के लिए हलाल मांस का सेवन करना वर्जित बताया गया है। हालांकि झटके से मारे गए जानवरों का मांस खाया जा सकता है। सिख धर्म का मानना है कि, किसी को एक बार में मार देने उसकी आत्मा तड़पती नहीं है, लेकिन हलाल का मांस जानवर को तड़पा-तड़पा कर तैयार किया जाता है, जो पूरी तरह से अशुद्ध माना जाता है।

इन 4 पापों के अलावा गुरु की वाणी का अनादर करना, पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान करना, गुरुओं के ज्ञान की अवहेलना करना भी पाप की श्रेणी में आता है। सिख धर्म के अनुसार सच्चा सिख बनने के लिए सबसे पहले कामवासना, क्रोध, लालच, मोह और घमंड से दूर रहना चाहिए, क्योंकि ये व्यक्ति के पतन का कारण बनते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।