भगवान विष्णु को समर्पित है ये व्रत  

वैसे तो प्रत्येक मास में दो एकादशी पड़ती हैं यानि कुल 24 एकादशी होती हैं। इस क्रम में आषाढ़ मास की कृष्णपक्ष में पड़ने वाली एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं। इसका व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस व्रत में पूजा पाठ के साथ दान का भी विशेष महत्व होता है। इस व्रत आैर  पूजा में चावल का प्रयोग वर्जित होता है। इस बार योगिनी एकादशी का मुहूर्त 8 जुलाई 2018 को रात्रि 23.30 बजे से प्रारम्भ हो कर 9 जुलाई 21.26 बजे तक रहेगा, लेकिन पूजन आैर  व्रत 9 तारीख  को  ही  किया जायेगा। वहीं व्रत के पारण का मुहूर्त अगले दिन 10 जुलार्इ को सुबह 05.33 से 8.15 बजे के बीच है। इस दिन के बाद भगवान शयन में चले जाते है। 

एेसे करें योगिनी एकादिशी पर पूजा 

सबसे पहले याद रखें की ये व्रत पूर्ण सात्विक रह  कर  ही करना चाहिए। इसके बाद योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की मूर्ति रखकर श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। साथ ही ॐ नमो भगवते वासुदेवाय महामंत्र का भी जाप करें। इसदिन पूजा और व्रत के साथ दान का भी अत्यंत महत्व माना जाता है। इस एकादशी को जल और अन्न का दान बहुत पुण्यकारी होता है। योगिनी एकादशी का व्रत करने वालों को पारण से पूर्व अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। यानि इस दिन फलाहार के साथ व्रत ही रखना उत्तम है। कुछ लोग इस दिन निर्जल व्रत भी करते हैं। इस दिन श्री कृष्ण उपासना का भी महत्व है। ब्रम्ह मुहूर्त में श्री रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें। एेसी भी मान्यता है कि जो लोग किसी रोग से पीड़ित हैं वो उस दिन श्री विष्णु उपासना के साथ साथ श्री सुन्दरकाण्ड का भी पाठ करें इससे श्रेष्ठ फल मिलता है। 

योगिनी एकादशी व्रत कथा 

मान्यता है कि यह कथा श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनार्इ थी। उन्होंने बताया कि कुबेर नाम का एक राजा था जो परम शिव भक्‍त था। उसके बाग में हेम नाम का एक माली था जो पूजा के लिए फूल लाया करता था। एक दिन वह फूल नहीं पहुंचा पाया। तब कुबेर गुस्‍सा हो गए और उसे बुलवाया आैर कहा कि तुमने शिवजी का अनादर किया है, इस‍लिए मैं तुम्हे शाप देता हूँ कि तुम स्त्री का वियोग सहोगे और मृत्युलोक में जाकर कोढ़ी होगे। इस तरह कोढ़ी के रूप में हेम का पुर्नजन्म जन्म हुआ, परंतु वो परम शिव भक्त था इसलिए उसको पिछले जन्म की सारी याद थी। एक बार जंगल में घूमते-घ़ूमते वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में पहुंचा और उनके चरणों पर गिर गया। उसके कष्ट को देखकर मारर्कंडेय ऋषि ने उसे अषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में योगिनी नामक एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करने को कहा, जिससे उसके पाप नष्ट हो सकते थे। हेम माली ने यह व्रत किया और उसके प्रभाव से  पुराने स्वरूप में आ गया आैर विवाह करके अपनी स्त्री के साथ सुखमय जीवन बिताने लगा। 

By Molly Seth