हनुमान के नाम का हर अक्षर है विशेष

हनुमानजी संकटमोचन कहलाते हैं। ‘हनुमान’ शब्द का ह ब्रह्मा का, नु अर्चना का, मा लक्ष्मी का और न पराक्रम का प्रतीक है। इसका अर्थ ये है कि उनके का हर अक्षर अपने में विशेषहै। सप्‍ताह में मंगलवार का दिन हनुमान जी की पूजा के निमित्‍त किया गया है। हनुमान जी की भक्ति करने से उनकी कृपा के द्वारा मनुष्य को शक्ति और समर्पण प्राप्त होता है। बजरंगबली की भक्ति से अच्छा भाग्य और विद्या भी प्राप्त होती है। शास्‍त्रों के अनुसार हनुमान जी को भगवान शिव का गयारहवां अवतार माना जाता है। 

दुख और क्‍लेश से मुक्‍ति

हनुमान जी की आराधना करने से हर पाप और हर कष्‍ट से मुक्‍त मिलती है। हनुमान जी भूत-प्रेत से भी अपने भक्‍तों को बचाते हैं। जिस घर में हनुमान जी की कृपा होती है वहां कोई भी दुख, क्‍लेश निकट नहीं आता। इन्हें सात चिरंजीवियो में से एक माना जाता है। वे सभी कलाओं में सिद्धहस्त एवं माहिर थे। राम के परम भक्त हनुमान बल, बुद्धि और विद्या के प्रदाता होने के साथ ही, अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता भी माने जाते हैं। वे ज्योतिष के भी प्रकांड विद्वान कहे जाते थे।  ऋग्वेद में उनके लिए ‘विश्ववेदसम्’ शब्द का प्रयोग किया गया है, इसका अर्थ है- विद्वानों में सर्वश्रेष्ठ। इन्‍हीं हनुमान जी की पूजा यदि कुछ विशेष मंत्रों से की जाये तो वे अत्‍यंत प्रसन्‍न होते हैं। 

ऐसे करें पूजा में मंत्रों का जाप

हनुमान जी की पूजा में निम्‍नलिखित चमत्कारिक मंत्रों का जाप किया जाए तो यह बहुत फलदायी होते हैं। हनुमान जी की पूजा करते समय उन्‍हें पान का बीड़ा जरूर चढ़ाना चाहिए। मनोकामना पूर्ति के लिए इमरती का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। उनके मंत्र इस प्रकार हैं 

1- श्री हनुमान मूल मंत्र:- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रं ह्रैं ह्रौं ह्रः॥ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।

2- हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल:। अकस्मादागतोत्पांत नाशयाशु नमोस्तुते।।

3- ऊँ हं हनुमंताय नम:। ऊँ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।।

Posted By: Molly Seth

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