नई दिल्ली, Vivah Panchami Shubh Muhurat 2022:हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। इसके साथ ही इसी दिन स्वामी तुलसी दास जी ने रामायण का अवधी संस्करण पूरा किया था। इस पर्व पर अयोध्या और नेपाल में विशेष आयोजन किया जाता है। इस साल विवाह पंचमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ कई अद्भुत योग बन रहे हैं। जानिए विवाह पंचमी की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व।

विवाह पंचमी 2022 का शुभ मुहूर्त (Vivah Panchami Shubh Muhurat)

विवाह पंचमी तिथि- 28 नवंबर, सोमवार

पंचमी तिथि की शुरुआत- 27 नवंबर को शाम 4 बजकर 25 मिनट पर

पंचमी तिथि समाप्त- 28 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 35 मिनट पर

28 नवंबर को उदया तिथि के कारण इसी दिन विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।

अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक

सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 10 बजकर 29 मिनट से 29 नवंबर को सुबह 6 बजकर 55 मिनट तक

रवि योग- सुबह 10 बजकर 29 मिनट से 29 नवंबर को सुबह 6 बजकर 55 मिनट तक

विवाह पंचमी 2022 महत्व

मान्यताओं के अनुसार, विवाह पंचमी के दिन माता सीता और भगवान राम का विवाह हुआ था। इसलिए इस दिन माता सीता और श्री राम की पूजा का विधान है। इस पर्व को अयोध्या और नेपाल में विशेष आयोजन किया जाता है। इन जगहों पर भव्य रूप से विवाह पंचमी का उत्सव मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन शुभ योग में मांगलिक कार्यों करने से शुभ फलों की की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इस दिन पूजन अनुष्ठान करने से दांपत्य जीवन में खुशियां ही खुशियां आती है। विवाह पंचमी के दिन कुछ खास उपाय करके वैवाहिक जीवन में आने वाली हर समस्या से छुटकारा पा सकता है।

विवाह पंचमी पूजा विधि (Vivah Panchami Puja Vidhi)

आज के दिन कई लोग व्रत भी रखते हैं। अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो स्नान आदि करने के बाद श्री राम विवाह का संकल्प लें। इसके बाद विधिवत तरीके से माता सीता और श्री राम का विवाह कराएं। इसके अलावा विवाह पंचमी के साथ श्री राम और माता सीता की पूजा विधिवत तरीके से कर सकते हैं। इसके लिए भगवान राम और सीता जी को फूल, माला, सिंदूर, अक्षत आदि चढ़ाने के साथ माता को लाल रंग के वस्त्र और सोलह श्रृंगार चढ़ाएं। इसके बाद भोग लगाएं। फिर दीपक और धूप जलाकर चालीसा, मंत्र के साथ विवाह प्रसंग का पाठ करें। इसके साथ ही विधिवत तरीके से आरती करें और भूल चूक के लिए माफी मांग लें।

डिसक्लेमर

इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।

Edited By: Shivani Singh

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