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Vaibhav Lakshmi Vrat: हर शुक्रवार ऐसे करें मां लक्ष्मी की पूजा, घर में कभी नहीं होगी धन की कमी

Published: Fri, 06 Mar 2026 11:19 AM (IST)

शुक्रवार को मां वैभव लक्ष्मी का व्रत रखने से घर में सुख-समृद्धि और वैभव आता है। यहां पढ़ें व्रत की संपूर्ण कथा, पूजा विधि और इसके चमत्कारिक लाभ।

Maa Vaibhav Lakshmi Vrat: मां वैभव लक्ष्मी का व्रत (Image Source: AI-Generated)

Maa Vaibhav Lakshmi Vrat: मां वैभव लक्ष्मी का व्रत (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेक्स, नई दिल्ली। शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी की असीम कृपा और ऐश्वर्य पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन वैभव लक्ष्मी का व्रत रखने का विशेष विधान है, जिसमें सुबह और शाम के प्रदोष काल (Pradosh Kaal) में पूजा करने के साथ-साथ व्रत कथा का पाठ करना जरूरी माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बिना कथा के यह व्रत पूर्ण नहीं होता। अगर आप अपने मन की किसी विशेष इच्छा को पूरा करना चाहते हैं, तो कम से कम 11 या 21 शुक्रवार तक श्रद्धापूर्वक यह व्रत रख सकते हैं।

वैभव लक्ष्मी व्रत कथा (Vaibhav Laxshmi Vrat Katha)

एक बहुत बड़ा शहर था, जहां शीला और उसका पति एक सादा और सुखद जीवन व्यतीत करते थे। शीला बहुत ही धार्मिक और संतोषी महिला थी, जबकि उसका पति भी सुशील और विवेकशील था। लेकिन जैसा कि शास्त्रों में कहा गया है कि कर्मों की गति निराली होती है, शीला का पति अचानक बुरी संगत में पड़ गया। वह जल्द से जल्द 'करोड़पति' बनने के सपने देखने लगा और इसी लालच में उसने शराब और जुए जैसी बुराइयों को अपना लिया। देखते ही देखते घर की सारी जमा-पूंजी और शीला के गहने खत्म हो गए और परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया।

शीला बहुत दुखी रहने लगी, लेकिन उसने ईश्वर पर भरोसा नहीं खोया। एक दोपहर उसके दरवाजे पर एक तेजस्वी मांजी आईं, जिनके चेहरे पर अलौकिक शांति थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे मांजी स्वयं माँ लक्ष्मी का स्वरूप थीं जो अपनी भक्त को रास्ता दिखाने आई थीं। उन्होंने शीला को वैभव लक्ष्मी व्रत की महिमा बताई।

व्रत की विधि (Vrat Vidhi): मांजी ने बताया कि शुक्रवार के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूरे दिन मां लक्ष्मी का स्मरण करें। शाम को प्रदोष काल में पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। एक पाटे पर चावल की ढेरी बनाकर उस पर जल से भरा तांबे का कलश रखें। कलश के ऊपर एक कटोरी में सोने या चांदी का कोई आभूषण (जैसे नाक की चुन्नी) रखकर उसे शास्त्रीय विधि से पूजें। अंत में शक्कर का प्रसाद चढ़ाएं।

puja vidhi

(Image Source: AI-Generated)

शीला ने पूर्ण श्रद्धा से 21 शुक्रवार (21 Friday Fast) तक यह व्रत किया और 21वें शुक्रवार को उद्यापन के समय सात स्त्रियों को व्रत की पुस्तकें उपहार में दीं। मां की कृपा से उसके पति की बुद्धि सुधर गई, उसने बुरी आदतें छोड़ दीं और मेहनत से व्यापार शुरू किया। देखते ही देखते घर फिर से धन-धान्य और खुशियों से भर गया।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।