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वैवाहिक जीवन में चाहिए सुख और शांति? सीता नवमी पर जानकी स्तोत्र के पाठ से दूर होंगे हर तरह के गृह क्लेश

Published: Fri, 24 Apr 2026 05:39 PM (GMT+05:30)

माता सीता दयालुता की साक्षात मूर्ति हैं, इसलिए सादगी से की गई पूजा से भी माता जानकी को प्रसन्न किया जा सकता है।

सीता नवमी पर जानकी स्तोत्र पाठ से पाएं अखंड सौभाग्य (Picture Credit: Freepik)

सीता नवमी पर जानकी स्तोत्र पाठ से पाएं अखंड सौभाग्य (Picture Credit: Freepik) 

HighLights

  1. सीता नवमी की पूजा से मिलते है अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

  2. पूजा से धन-धान्य में होती है वृद्धि और दूर होती है दरिद्रता

  3. माता सीता की पूजा से होती है मनोकामनाओं की पूर्ति

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, सीता नवमी का पर्व वैशाख शुक्ल नवमी को पड़ता है। ऐसे में शनिवार 25 अप्रैल को यह पावन पर्व मनाया जाएगा। इस दिन माता सीता की पूजा में जानकी स्तोत्र और श्री जानकी स्तुति का पाठ करना विशेष फलदायी बताया गया है।

यह माता सीता को समर्पित एक अत्यंत पावन और दिव्य स्तोत्र है, जिसके पाठ से आपको माता सीता की असीम कृपा प्राप्त हो सकती है। चलिए पढ़ते हैं श्री जानकी स्तोत्र और श्री जानकी स्तुति।

जानकी स्तोत्र

नीलनीरज-दलायतेक्षणां लक्ष्मणाग्रज-भुजावलम्बिनीम्।

शुद्धिमिद्धदहने प्रदित्सतीं भावये मनसि रामवल्लभाम्।

रामपाद-विनिवेशितेक्षणामङ्ग-कान्तिपरिभूत-हाटकाम्।

ताटकारि-परुषोक्ति-विक्लवां भावये मनसि रामवल्लभाम्।।

कुन्तलाकुल-कपोलमाननं, राहुवक्त्रग-सुधाकरद्युतिम्।

वाससा पिदधतीं हियाकुलां भावये मनसि रामवल्लभाम्।।

कायवाङ्मनसगं यदि व्यधां स्वप्नजागृतिषु राघवेतरम्।

तद्दहाङ्गमिति पावकं यतीं भावये मनसि रामवल्लभाम्।।

इन्द्ररुद्र-धनदाम्बुपालकै: सद्विमान-गणमास्थितैर्दिवि।

पुष्पवर्ष-मनुसंस्तुताङ्घ्रिकां भावये मनसि रामवल्लभाम्।।

संचयैर्दिविषदां विमानगैर्विस्मयाकुल-मनोऽभिवीक्षिताम्।

तेजसा पिदधतीं सदा दिशो भावये मनसि रामवल्लभाम्।।

।।इति जानकीस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।

Sita Navami AI (3)

(Picture Credit- AI Generated)

जानकी स्तोत्र के लाभ

  • विवाहित महिलाएं यदि इस स्तोत्र का पाठ करती हैं, तो इनसे उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है और वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है।
  • इस स्तोत्र का पाठ करने से घर की दरिद्रता दूर होती है और माता सीता जी की कृपा से धन-धान्य की वृद्धि होती है।
  • जानकी स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को अनजाने भय से भी मुक्ति मिलती है और पाप नष्ट होते हैं।
  • सीता नवमी के दिन श्रद्धापूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
  • यह स्तोत्र मानसिक शांति प्रदान करता है और आत्मविश्वास को बढ़ाने में भी सहायक है।
  • माता जानकी की कृपा से साधक को शत्रुओं पर विजय मिलती है। 

श्री जानकी स्तुति

जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम्।

जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम्।।1।।

दारिद्र्यरणसंहर्त्रीं भक्तानाभिष्टदायिनीम्।

विदेहराजतनयां राघवानन्दकारिणीम्।।2।।

भूमेर्दुहितरं विद्यां नमामि प्रकृतिं शिवाम्।

पौलस्त्यैश्वर्यसंहत्रीं भक्ताभीष्टां सरस्वतीम्।।3।।

पतिव्रताधुरीणां त्वां नमामि जनकात्मजाम्।

अनुग्रहपरामृद्धिमनघां हरिवल्लभाम्।।4।।

आत्मविद्यां त्रयीरूपामुमारूपां नमाम्यहम्।

प्रसादाभिमुखीं लक्ष्मीं क्षीराब्धितनयां शुभाम्।।5।।

नमामि चन्द्रभगिनीं सीतां सर्वाङ्गसुन्दरीम्।

नमामि धर्मनिलयां करुणां वेदमातरम्।।6।।

पद्मालयां पद्महस्तां विष्णुवक्ष:स्थलालयाम्।

नमामि चन्द्रनिलयां सीतां चन्द्रनिभाननाम्।।7।।

आह्लादरूपिणीं सिद्धिं शिवां शिवकरीं सतीम्।

नमामि विश्वजननीं रामचन्द्रेष्टवल्लभाम्।

सीतां सर्वानवद्याङ्गीं भजामि सततं हृदा।।8।।

देवी सीता के मंत्र

1. सामान्य मंत्र -

श्री जानकी रामाभ्यां नमः।

2. मूल मंत्र -

श्री सीतायै नमः।

3. देवी सीता गायत्री मंत्र -

ॐ जनकाय विद्महे राम प्रियाय धीमहि।
तन्नो सीता प्रचोदयात्॥

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