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शीतला अष्टमी 2026: आज घर-घर गूंजेगी मां की ये आरती, नोट कर लें आरती के बोल और पूजा का महामुहूर्त

Published: Wed, 11 Mar 2026 06:30 AM (IST)Updated: Wed, 11 Mar 2026 09:02 AM (IST)

Sheetala Ashtami Aarti: आज शीतला अष्टमी पर पढ़ें वह आरती जिसके बिना अधूरा है यह व्रत। साथ ही, जानें पूजा का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त।

Sheetala Ashtami Aarti: शीतला अष्टमी पर करें ये आरती (Image Source: AI-Generated)

Sheetala Ashtami Aarti: शीतला अष्टमी पर करें ये आरती (Image Source: AI-Generated)

HighLights

  1. इस व्रत को करने से बच्चों को मौसमी बीमारियों से सुरक्षा मिलती है

  2. इस दिन लोग मां शीतला की पूजा और दान-दक्षिणा करते हैं

  3. पूजा के बाद बासी भोजन पूरा परिवार प्रसाद के रूप में ग्रहण करता है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज शीतला अष्टमी (Sheetala Ashtami 2026) है, जिसे 'बासोड़ा' भी कहा जाता है। यह सिर्फ एक सामान्य व्रत नहीं बल्कि स्वास्थ्य और परंपरा का एक अनूठा मेल है।

मान्यता है कि चैत्र मास की इस अष्टमी पर माता शीतला की आराधना करने से मन को शांति मिलती है। साथ ही, बदलते मौसम (गर्मियों) में होने वाली बीमारियों से भी सुरक्षा मिलती है।

शीतला अष्टमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

मुख्य तिथि: 11 मार्च 2026, दिन बुधवार

पूजा का सबसे शुभ समय: सुबह 06:36 AM से लेकर शाम 06:27 PM तक (पूरा दिन पूजा के लिए श्रेष्ठ है)

अष्टमी तिथि का प्रारंभ: 11 मार्च 2026 को रात 01:54 AM बजे से

अष्टमी तिथि का समापन: 12 मार्च 2026 को सुबह 04:19 AM बजे तक

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(Image Source: AI-Generated)

शीतला माता की आरती (Shitla Mata Aarti)

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता,
आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता। जय शीतला माता…

रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता,
ऋद्धि-सिद्धि चंवर ढुलावें, जगमग छवि छाता। जय शीतला माता…

विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता,
इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा,
सूरज ताल बजाते नारद मुनि गाता। जय शीतला माता…

घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता,
करै भक्त जन आरति लखि लखि हरहाता। जय शीतला माता…

ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता,
भक्तन को सुख देनौ मातु पिता भ्राता। जय शीतला माता…
वेद पुराण बरणत पार नहीं पाता । जय शीतला माता…

जो भी ध्यान लगावें प्रेम भक्ति लाता,
सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता। जय शीतला माता…

रोगन से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता,
कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता। जय शीतला माता…

बांझ पुत्र को पावे दारिद कट जाता,
ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछिताता।

जय शीतला माता…शीतल करती जननी तू ही है जग त्राता,
उत्पत्ति व्याधि विनाशत तू सब की घाता। जय शीतला माता

दास विचित्र कर जोड़े सुन मेरी माता,
भक्ति आपनी दीजे और न कुछ भाता।
जय शीतला माता…।

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