Shravan Purnima 2020: हर मास के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह तिथि बेहद ही सौभाग्यशाली होती है। वहीं, यह तिथि श्रावण मास में आने से इसके मायने और भी अधिक हो जाते हैं। बता दें कि कल यानी सावन के आखिरी दिन श्रावण पूर्णिमा है। अगर आप श्रावण पूर्णिमा का व्रत करते हैं तो यहां हम आपको इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि की जानकारी दे रहे हैं।

श्रावण पूर्णिमा का मुहूर्त:

पूर्णिमा तिथि आरंभ: आज रात 8 बजकर 36 मिनट से

पूर्णिमा तिथि समाप्त: कल रात 8 बजकर 21 मिनट पर

ज्योतिषाचार्य पं गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया, श्रावण शुक्ल पूर्णिमा में ऋग, यजु, साम के स्वाध्यायी ब्राम्हण, क्षत्रिय, और वैश्य जो ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, किसी आश्रम के हो अपने-अपने वेद कार्य और क्रियाा के अनुकूल काल में इस कर्म को संपन्न किया जाता है। इसका आद्योपान्त पूरा विधान लिखकर बताना संभव नहीं है और इसे संक्षिप्त में बताना उपयोगी नहीं होगा। ऐसे में सामान्य तौर पर यह कहना सही होगा कि इस दिन नदी आदि के तटवर्ती स्थान पर जाएं और यथा विधि स्नान करें। कुशा निर्मित ऋषियों की स्थापना कर उनका पूजन करें। साथ ही तर्पण और विसर्जन भी करें। रक्षा पोटलिका बनाकर उसका मार्जन करे। उसके बाद आने वाले वर्ष का अध्ययन क्रम नियत करें और सायं काल के समय व्रत की पूर्ति करें। इसमें उपाकर्पमद्धति आदि के अनुसार कई कार्य किए जाते हैं। विद्वानों से जानकर यह कर्म प्रतिवर्ष सोपवीती प्रत्येक द्विज को अवश्य करना चाहिए। यद्यपि उपाकर्म चातुर्मास में किया जाता है। इन दिनों नदियां रजस्वला होती हैं, तथापि

उपकर्माणि चोत्सर्गे प्रेतस्नाने तथैव च।

चन्द्रसूर्यग्रहे चैव रजोदोषो न विद्यते।।

इस वशिष्ठ वाक्य के अनुसार, उपाकर्म में उसका दोष नहीं माना जाता।

श्रवण पूजन:

एक बार श्रवण कुमार अपने नेत्रहीन माता पिता के लिए रात में जल लाने गया। उसी समय वहां राजा दशरथ हिरण की ताक में छुपे हुए थे। उन्होंने जल के घड़े की आवाज को पशु की आवाज समझकर बाण छोड़ दिया। इससे श्रवण की मृत्यु हो गई। बेटे की मृत्यु की खबर सुनकर माता-पिता बेहद दुखी हुए। इस पर दशरथ जी ने उनको आश्वासन दिया और कहा कि वो अपने अपराध की क्षमा याचना कर रहे हैं। उन्होंने श्रावणी को श्रवण पूजा का सर्वत्र प्रचार किया। उस दिन से संपूर्ण सनातनी श्रवण पूजा करते हैं।

 

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