यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 27, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Mahalakshmi Ashtak: आर्थिक तंगी से पाना चाहते हैं छुटकारा, तो रोजाना करें 'महालक्ष्मी अष्टक' का पाठ
Mahalakshmi Ashtak धार्मिक मान्यता है कि वैभव लक्ष्मी व्रत करने से साधक के जीवन में व्याप्त धन संबंधी परेशानी शीघ्र ...और पढ़ें

नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क। Mahalakshmi Ashtak: सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन धन की देवी या अधिष्ठात्री मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस शुभ तिथि पर देश भर के लक्ष्मी नारायण मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। जगत के पालनहार भगवान विष्णु के उपासक कठिन भक्ति कर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करते हैं। साधक मां लक्ष्मी के निमित्त 'वैभव लक्ष्मी व्रत' भी रखते हैं। इस व्रत को स्त्री और पुरुष दोनों कर सकते हैं। इस व्रत को अंतर रख भी किया जा सकता है। अतः साधक को 'वैभव लक्ष्मी व्रत' रखने में सुविधा होती है। धार्मिक मान्यता है कि 'वैभव लक्ष्मी व्रत' करने से साधक के जीवन में व्याप्त धन संबंधी परेशानी शीघ्र दूर हो जाती है। मां लक्ष्मी अपने साधकों पर कृपा बरसाती हैं। उनकी कृपा से आय, सौभाग्य और धन में सोच से अधिक वृद्धि होती है। अगर आप भी धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो रोजाना प्रातः काल में स्नान-ध्यान के बाद महालक्ष्मी अष्टक का पाठ और धन प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप अवश्य करें। आइए, महालक्ष्मी अष्टक का पाठ करें-
लक्ष्मी जी के मंत्र
1.
या देवी सर्वभूतेषु पुष्टिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
2.
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
3.
या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
4.
या देवी सर्वभूतेषु पुष्टिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
5.
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
6.
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
7.
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
8.
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
महालक्ष्मी अष्टक
नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्षि्म नमोस्तु ते॥
नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि ।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥
सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि ।
सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥
सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि ।
मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥
आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि ।
योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥
स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्ति महोदरे ।
महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥
पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि ।
परमेशि जगन्माता महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥
श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते ।
जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥
फलश्रुति
महालक्ष्म्यष्टकस्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः ।
सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥
एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् ।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः ॥
त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् ।
महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्न वरदा शुभा ॥
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