यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 11, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Shadakshar Stotra: सावन के दूसरे मंगलवार पर करें शिव षडक्षर स्तोत्र का पाठ, प्राप्त होगा महादेव का आशीर्वाद
Shadakshar Stotra सनातन धर्म शास्त्रों में निहित है कि भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार हनुमान जी हैं। अतः सावन ...और पढ़ें

नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क। Shadakshar Stotra: सावन महीने का आज दूसरा मंगलवार है। इस दिन विवाहित स्त्रियां और अविवाहित लड़कियां मंगला गौरी व्रत रख विधि विधान से देवों के देव महादेव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। इस व्रत के पुण्य प्रताप से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। सनातन धर्म शास्त्रों में निहित है कि भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार हनुमान जी हैं। अतः सावन महीने के प्रत्येक मंगलवार पर हनुमान जी की भी श्रद्धा भाव से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मंगलवार के दिन हनुमान की पूजा उपासना करने से साधक के जीवन में व्याप्त दुख और संकट दूर हो जाते हैं। साथ ही बल, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति होती है। अगर आप भी देवों के देव महादेव का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो सावन महीने के दूसरे मंगलवार पर पूजा के समय शिव रामाष्टक और शिव षडक्षर स्तोत्र का पाठ अवश्य करें।
शिव रामा अष्टक स्तोत्रम्
शिव हरे शिव राम सखे प्रभो त्रिविधतापनिवारण हे प्रभो ।
अज जनेश्वर यादव पाहि मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥
कमललोचन राम दयानिधे हर गुरो गजरक्षक गोपते ।
शिवतनो भव शङ्कर पाहि मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥
सुजनरञ्जन मङ्गलमन्दिरं भजति ते पुरुषः परमं पदम्।
भवति तस्य सुखं परमद्भुतं शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥
जय युधिष्ठिरवल्लभ भूपते जय जयार्जितपुण्यपयोनिधे।
जय कृपामय कृष्ण नमोऽस्तु ते शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥
भवविमोचन माधव मापते सुकविमानसहंस शिवारते।
जनकजारत राघव रक्ष मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥
अवनिमण्डलमङ्गल मापते जलदसुन्दर राम रमापते।
निगमकीर्तिगुणार्णव गोपते शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥
पतितपावन नाममयी लता तव यशो विमलं परिगीयते।
तदपि माधव मां किमुपेक्षसे शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥
अमरतापरदेव रमापते विजयतस्तव नामधनोपमा।
मयि कथं करुणार्णव जायते शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥
हनुमतः प्रिय चापकर प्रभो सुरसरिद्धृतशेखर हे गुरो।
मम विभो किमु विस्मरणं कृतं शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥
अहरहर्जनरञ्जनसुन्दरं पठति यः शिवरामकृतं स्तवम्।
विशति रामरमाचरणाम्बुजे शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥
प्रातरुत्थाय यो भक्त्या पठेदेकाग्रमानसः।
विजयो जायते तस्य विष्णुमाराध्यमाप्नुयात् ॥
शिव षडक्षर स्तोत्र
ओंकारसंज्ञाय समस्तवेद-पुराणपुण्यागमपूजिताय।
ओंकाररूप प्रियदर्शनाय ओंकाररूपाय नमः शिवाय॥
नाना जराव्याधि विनाशनाय नाथाय लोकस्य जगद्धिताय ।
नाना कलाज्ञान निदर्शनाय तस्मै नकाराय नमः शिवाय ॥
मात्सर्यदोषान्तक संभवाय मातुः पितुः दुःखनिवरणाय।
माहेश्वरी सूक्ष्मवराय नित्यं तस्मै मकाराय नमः शिवाय ॥
शीलव्रतज्ञानदृढव्रताय शीलासुवर्णाय समुत्सुकाय।
शीघ्राय नित्यं सुरसेविताय तस्मै शिकाराय नमः शिवाय ॥
वामार्धविद्युत्प्रतिमप्रभाय वचो मनः कर्म विमोचनाय।
वागीश्वरी सूक्ष्मवराय नित्यं तस्मै वकाराय नमः शिवाय ॥
यक्षोरगेन्द्रादिसुरावृताय यक्षाङ्गनाजन्मविमोचनाय।
यक्षेषु लोकेषु जगद्धिताय तस्मै यकाराय नमः शिवाय ॥
उत्फुल्लनीलोत्पललोचनायै कृशानुचन्द्रार्कविलोचनाय।
निरीश्वरायै निखिलेश्वराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥
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