Radha Ashtami 2020 Date: हिन्दी पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बाल गोपाल कृष्ण का जन्म हुआ था और भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा रानी का जन्म हुआ था। जन्माष्टमी का त्योहार 11 अगस्त और 12 अगस्त को आनंनपूर्वक मनाया गया। इस बार राधा अष्टमी 26 अगस्त दिन बुधवार को पड़ रही है। राधा अष्टमी को राधा जयंती भी कहा जाता है। राधा अष्टमी के दिन राधा रानी का श्रृंगार होता है और विधि विधान से पूजन किया जाता है। आइए जानते हैं राधा अष्टमी के मुहूर्त ​आदि के बारे में।

राधा अष्टमी मुहूर्त

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 25 अगस्त दिन मंगलवार को दोपहर 12 बजकर 21 मिनट पर हो रहा है, जो 26 अगस्त दिन बुधवार को सुब​ह 10 बजकर 39 मिनट तक है। राधा जी का जन्म दोपहर में हुआ था, इसलिए दोपहर में ही पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है।

रावल गांव में जन्मीं थीं राधा रानी

राधा रानी का जन्म मथुरा के रावल गांव में वृषभानु जी और माता कीर्ति के घर हुआ था। ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि राधा जी का भी जन्म उनकी मां के गर्भ से नहीं हुआ, बल्कि बाल कृष्ण जैसे ही वे भी प्रकट हुई थीं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राधा जी बाल श्रीकृष्ण से आयु में बड़ी थीं। उनका प्रकाट्य भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को और बाल गोपाल का प्रकाट्य भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को हुआ था।

राधा अष्टमी व्रत का महत्व

राधा अष्टमी का व्रत करने से समस्त पापों का नाश होता है। राधा अष्टमी का व्रत मुख्यत: महिलाएं ही रखती हैं। राधा रानी उनको अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं। साथ ही घर परिवार में सुख-समृद्धि और शांति रहती है तथा नि:संतानों को संतान सुख प्राप्त होता है। इस दिन व्रत रहने से घर में सदा ही लक्ष्मी का वास होता है। सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जीवन सुखमय हो जाता है।

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