यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 15, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Pitru Paksha: पारस पीपल सहित इन पेड़ों की करें विधिवत पूजा, पितृ दोष से मुक्ति के लिए हैं सबसे कारगर
Pitru Paksha 2022 पितृ पक्ष के अवधि में पितरों के आत्मा की शांति के लिए कई प्रकार के कर्म किए ...और पढ़ें

नई दिल्ली, Pitru Paksha 2022: 10 सितम्बर से पितृ पक्ष कि शुरुआत हो चुकी है। शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में तर्पण और पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को मुक्ति मिलती है और वह अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। मान्यता यह भी है कि पितृ पक्ष में कुछ कर्म जैसे दान, पशुओं को भोजन देना, ब्राह्मण भोजन करने से भी पितरों की आत्मा को मुक्ति प्राप्त होती है। इनके अलावा यह भी बताया गया है कि कुछ विशेष पेड़-पौधों की पूजा करने से भी लोगों को बहुत लाभ मिलता है। श्राद्ध पक्ष में इन विशेष पेड़ों की पूजा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और धन व भाग्य में उत्पन्न हो रही समस्याएं दूर हो जाती हैं। आइए जानते हैं किन-किन पेड़ों की पूजा से होता है व्यक्ति को सबसे अधिक लाभ।
पितृ पक्ष में करें इन पेड़-पौधों की पूजा
पारस पीपल
हिन्दू धर्म में पीपल के पेड़ को सबसे पवित्र माना जाता है। पौराणिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु स्वयं निवास करते हैं। यही कारण है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में पीपल के पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में भी बताया गया है कि पीपल के पेड़ की पूजा से व्यक्ति कई प्रकार के दोष से मुक्त हो जाता है। पितृ दोष इनमें मुख्य है। इसलिए पितृ पक्ष में पीपल खासकर पारस पीपल के पेड़ की पूजा करने से व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है। बता दें कि पारस पीपल न केवल पितृ दोष को दूर करने में कारगर में है बल्कि इससे कई प्रकार की औषधीय लाभ भी मिलते हैं। जिस वजह से इसे घर के बगीजे में पारस पीपल का पौधा लगाने से स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं भी दूर हो जाएंगी।
बरगद पेड़
शास्त्रों में बरगद के पेड़ को भी बहुत गुणकारी पेड़ माना गया है। मान्यताओं के अनुसार इस पेड़ में भगवान शिव वास करते हैं जिस कारण से कई धार्मिक अनुष्ठानों में इसका होना अनिवार्य होता है। पितृ पक्ष में इस पेड़ की पूजा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और पितृ दोष से भी मुक्ति प्राप्त होती है। श्राद्ध पक्ष के दौरान जल में काला तिल मिलाकर बरगद के पेड़ में डालें और अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें। इस पेड़ के नीचे बैठकर भगवान शिव की पूजा करने से भी व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है।
बेल का पेड़
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बेल फल का रस और बेलपत्र का प्रयोग किया जाता है। लेकिन पितृ पक्ष के अवधि में इस पेड़ की पूजा से करने से व्यक्ति को सर्वाधिक लाभ मिलता है। मान्यता यह भी है कि जिन परिजनों की मृत्यु समय से पूर्व हो चुकी है उन्हें भी मृत्युलोक से मुक्ति मिल जाती है। मान्यताओं के अनुसार बेल के पेड़ में भोलेनाथ और माता लक्ष्मी स्वयं वास करते हैं। इस वजह से इस वृक्ष का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। बेल के पौधे को घर के बगीचे में लगाने से पितर प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
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