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Parameshwara Stuti Stotra: महादेव की अमोघ शक्ति है यह स्तोत्र, नियमित पाठ से दूर होंगे सारे कष्ट

Published: Wed, 04 Feb 2026 06:30 PM (GMT+05:30)

Parameshwara Stuti Stotra: क्या आप मानसिक अशांति या जीवन की बाधाओं से परेशान हैं? जानें महादेव का प्रिय परमेश्वर स्तुति ...और पढ़ें

परमेश्वर स्तुति स्तोत्र का पाठ (Image Source: Freepik)

परमेश्वर स्तुति स्तोत्र का पाठ (Image Source: Freepik)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान शिव को 'अशुतोष' कहा जाता है, जिसका अर्थ है जो शीघ्र प्रसन्न हो जाएं। महादेव की कृपा पाने के लिए भक्तों ने कई स्तुतियों और स्तोत्रों की रचना की है, लेकिन 'परमेश्वर स्तुति स्तोत्र'(Parameshwara Stuti Stotra) का अपना एक अलग और विशेष महत्व है। यह स्तोत्र न केवल प्रभु की महिमा गाता है, बल्कि भक्त के अंतर्मन को शुद्ध करने की शक्ति भी रखता है।

स्तोत्र का महत्व और आध्यात्मिक आधार

धार्मिक ग्रंथों और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, इस स्तोत्र का पाठ उस समय सबसे अधिक फलदायी होता है जब व्यक्ति स्वयं को असहाय या संकटों से घिरा हुआ महसूस करता है। शास्त्रों के जानकारों का कहना है कि यह स्तोत्र शिव के विराट और कल्याणकारी स्वरूप का वर्णन करता है। इसके नियमित जाप से व्यक्ति के भीतर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

पाठ से होने वाले चमत्कारी लाभ

अगर आप इस स्तोत्र को अपनी दैनिक पूजा का हिस्सा बनाते हैं, तो आपको निम्नलिखित लाभ प्राप्त हो सकते हैं:

मानसिक शांति: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव आम है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस स्तोत्र की ध्वनियां मस्तिष्क को शांत करने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती हैं।

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(Image Source: AI-Generated)

बाधाओं का नाश: जीवन में आने वाली अनचाही रुकावटें महादेव की इस स्तुति से दूर होने लगती हैं।

पापों से मुक्ति: पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि सच्चे मन से की गई यह स्तुति अनजाने में हुए पापों के प्रभाव को कम करती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

कैसे करें पाठ? (नियम और विधि)

  • सफेद या केसरिया वस्त्र पहनकर भगवान शिव की मूर्ति या चित्र के सामने दीप जलाएं।
  • ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इसका पाठ अगर सोमवार या प्रदोष के दिन किया जाए, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।
  • पाठ के अंत में भगवान शिव को बेलपत्र और जल अर्पित करना न भूलें, क्योंकि यह उनकी पूजा की पूर्णता का प्रतीक है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।