Narasimha Jayanti 2019: नृसिंह चतुर्दशी व्रत वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को किया जाता है, जो इस वर्ष शुक्रवार 17 मई को है। इस दिन हिरण्यकश्यप से भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु आधे सिंह और आधे नर का स्वरूप धारण करके प्रकट हुए थे, इसीलिए उनके इस अवतार को भगवान नृसिंह कहा गया।

व्रत एवं पूजा विधि

व्रत के दिन सुबह में सूर्य को साक्षी मानकर व्रत का संकल्प लें और तांबे के पात्र में जल लें।

नृसिंह देवदेवेश तव जन्मदिने शुभे।

उपवासं करिष्यामि सर्वभोगविवर्जित:।।

इस मंत्र से संकल्प करके मध्याह्न के समय नदी आदि पर जाकर क्रमश: तिल, गोमय, मृत्तिका और आँवले मलकर पृथक-पृथक चार बार स्नान करें। इसके बाद शुद्ध स्नान करके वहीं नित्य कृत्य करें। फिर घर आकर क्रोध, लोभ, मोह, मिथ्याभाषण, कुसंग और पापाचार आदि का सर्वथा त्याग करके ब्रह्मचर्य सहित उपवास करें।

सायंकाल एक वेदी पर अष्टदल बनाकर उस पर सिंह, नृसिंह और लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करके पूजन करें। रात्रि में गायन-वादन, पुराण श्रवण या हरि संकीर्तन से जागरण करें। दूसरे दिन फिर पूजन करें और ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन करें। इस प्रकार प्रतिवर्ष करते रहने से नृसिंह भगवान उसकी सब जगह रक्षा करते हैं और धनधान्य देते हैं।

नृसिंह व्रत कथा (सारांश)

नृसिंह पुराण के अनुसार, जब हिरण्यकश्यप का संहार करके नृसिंह भगवान कुछ शान्त हुए, तब भक्त प्रह्लाद ने पूछा, ' हे भगवन्! अन्य भक्तों की अपेक्षा मेरे प्रति अधिक स्नेह होने का क्या कारण है?' तब भगवान ने कहा, 'पूर्वजन्म में तू विद्या हीन, आचारहीन, वासुदेव नाम का ब्राह्मण था। एक बार मेरे व्रत के दिन ( वैशाख शुक्ल चतुर्दशी) विशेष कारण वश तूने न जल पिया, न भोजन किया, न सोया और ब्रह्मचर्य से रहा। इस प्रकार स्वत: सिद्ध उपवास और जागरण हो जाने के प्रभाव से तू भक्तराज प्रह्लाद हुआ।

— ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र

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Posted By: kartikey.tiwari

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